युवा ही भविष्य हैं उनका मार्गदर्शन करें, उन पर दबाव न डालें
युवाओं की ऊर्जा हुल्लड़बाज़ी के लिए नहीं है। युवावस्था तो आकांक्षा से युक्त जोशपूर्ण गतिविधि की अवस्था होनी चाहिए
जैजैपुर : इंजीनियरों में एक बहुत पुरानी कहावत है, “आधे खाली और आधे भरे हुए गिलास को देखने के बीच, यह संभावना भी हो सकती है कि गिलास दोगुनी धारिता वाला बनाया जाए।” जब युवाओं की ऊर्जा बुज़ुर्गों के विवेक द्वारा मार्गदर्शित होती है तब कई नए दृष्टिकोण सामने आते हैं। युवा कोई जंगली घोड़े नहीं हैं जिन्हें आपको बलपूर्वक नियंत्रित करना है। उन्हें हमेशा प्रेरित करने और उन्हें एक बल के रूप में खुली छूट दिए जाने की ज़रूरत है।
युवाओं की सबसे बड़ी ताकत उनकी ऊर्जा है। उनकी ऊर्जा ही उन्हें रचनात्मक बनाती है।
यह आग कोई नहीं बुझा सकता। जीवन के इस चरण में कोई निष्क्रियता नहीं होती। जब युवा ऊर्जाएँ सही दिशा में मार्गदर्शन पाती हैं तब ऐसी ऊर्जा रचनात्मक ऊर्जा बन जाती है। युवाओं की ऊर्जा हुल्लड़बाज़ी के लिए नहीं है। युवावस्था तो आकांक्षा से युक्त जोशपूर्ण गतिविधि की अवस्था होनी चाहिए। प्रश्न यह है कि ऐसी कौन सी आकांक्षा है जिससे उन्हें प्रेरणा मिल सकती है? उन्हें सीखना चाहिए कि वे सौम्य और प्रेममय कैसे बनें, विवेकवान कैसे बनें। स्वयंसेवा करना, ध्यान करना, बुज़ुर्गों से मार्गदर्शन पाना — ये सब युवाओं के लिए उनके विकास में सहायक होते हैं।