कर्नाटक की दरगाह में शिवलिंग की पूजा क्यों शुरू हुई? जानें कैसे हिन्दू-मुस्लिमों का धार्मिक स्थल बना

कर्नाटक की दरगाह में शिवलिंग की पूजा क्यों शुरू हुई? जानें कैसे हिन्दू-मुस्लिमों का धार्मिक स्थल बना

कर्नाटक  : कर्नाटक हाईकोर्ट ने महाशिवरात्रि पर अलंड में स्थित लाडले मशक दरगाह के भीतर शिवलिंग की पूजा की अनुमति दे दी है. इसके साथ ही कोर्ट के आदेश ने कर्नाटक वक्फ ट्रिब्यूनल के उस व्यवस्था को बरकरार रखा है, जिसमें दरगाह में धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन करने के लिए एक शेड्यूल तैयार किया गया है.

आइए जान लेते हैं कि क्या है लाडले मशक दरगाह का इतिहास और हिंदुओं से इसका कनेक्शन?

शिवाजी महाराज के गुरु की समाधि

लाडले मशक दरगाह के भीतर ही छत्रपति शिवाजी महाराज के गुरु संत राघव चैतन्य की समाधि भी स्थित है. इसकी स्थापना 15वीं शताब्दी में की गई थी. इसी समाधि के ऊपर एक शिवलिंग की स्थापना की गई थी, जिसकी पूजा तभी से होती आ रही थी. बहुत से हिन्दू श्रद्धालु इस दरगाह में जाते थे और राघव चैतन्य शिवलिंग की पूजा करते थे. एक स्थानीय जोशी परिवार यहां पर दैनिक रीति-रिवाजों को संपन्न कराता आ रहा है.

साल 2022 में बिगाड़ा गया सांप्रदायिक सौहार्द्र

15वां शताब्दी से लेकर साल 2022 तक यहां पर किसी तरह का कोई विवाद नहीं था. हिन्दुओं और मुसलमानों के बीच सांप्रदायिक सौहार्द्र बना हुआ था. हिन्दू और मुसलमान दोनों ही यहां पर अपनी-अपनी परंपराओं के हिसाब से आराधना करते थे. हालांकि, साल 2022 में कुछ असामाजिक तत्वों ने शिवलिंग पर गंदगी फैलाकर सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने की कोशिश की थी. इससे हिन्दुओं के बीच नाराजगी फैल गई थी.

167 से ज्यादा लोगों को सांप्रदायिक सौहार्द्र बिगाड़ने के लिए गिरफ्तार भी किया गया था. इसके साथ ही किसी भी तरह की स्थिति बिगड़ने से रोकने के लिए जिला प्रशासन ने पूरे अलंड में धारा 144 लगा दी थी, जिससे वहां लोग इकट्ठा न हो सकें.

हाईकोर्ट में दाखिल की गई थी याचिका

इस घटना के सामने आने के बाद स्थानीय भाजपा नेताओं और हिन्दू संगठनों ने दरगाह में शुद्धीकरण करने की कोशिश की तो उन पर हथियारों और पत्थरों से हमला कर दिया गया था. हाल ही में सिद्धरमैया हीरमठ की अगुवाई में हिन्दू संगठनों की ओर से हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर राधव चैतन्य शिवलिंग की पूजा करने की अनुमति मांगी गई थी. इस पर वक्फ बोर्ड ने दलील दी थी कि दरगाह में किसी शिवलिंग का अस्तित्व नहीं है.

हालांकि, दरगाह की जांच-पड़ताल के बाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया. याचिका में वैसे तो 500 लोगों के पूजा करने की अनुमति मांगी गई थी पर कोर्ट ने केवल 15 लोगों को पूजा करने की अनुमति प्रदान की.

अलग-अलग समय पर पूजा की अनुमति

इससे पहले कर्नाटक वक्फ ट्रिब्यूनल ने निर्देश दिया था कि मुस्लिम समुदाय के लोग सुबह 8 बजे से 12 बजे तक उर्स से जुड़ी परंपराओं का पालन दरगाह में करेंगे. दोपहर दो बजे से शाम छह बजे तक हिन्दू श्रद्धालु राघव चैतन्य शिवलिंग की पूजा करेंगे. इस पर अब हाईकोर्ट की मुहर भी लग गई है. इसके साथ ही दरगाह के चारों ओर सुरक्षा सख्त कर दी गई है और पुलिस ने 12 चेकप्वाइंट स्थापित किए हैं. इसके अलावा सर्विलांस के लिए ड्रोन भी तैनात किए गए हैं.

दुकानें बंद रखने का किया फैसला

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में जोर दिया है कि दोनों ही समुदायों के लोग अपने-अपने टाइम स्लॉट का पूरी तरह से पालन करेंगे और दरगाह को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचने देंगे. अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि रीति-रिवाजों के पालन के दौरान वे इस बात का ख्याल रखें कि दरगाह में किसी भी प्रकार का अनाधिकृत बदलाव न किया जा सके.

महाशिवरात्रि पर पूजा आदि के दौरान वैसे तो स्थानीय पुलिस-प्रशासन ने यहां पर किसी भी तरह से दुकानें आदि बंद करने का आदेश नहीं दिया है पर एहतियात के तौर पर बहुत से स्थानीय दुकानदारों ने खुद ही दुकानें बंद रखने का फैसला किया है. पुलिस अधीक्षक इशा पंत ने इसकी पुष्टि की है.


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