आज संविधान बचाने की दुहाई देने वालों ने ही संविधान की हत्या की थी : विष्णु देव साय

आज संविधान बचाने की दुहाई देने वालों ने ही संविधान की हत्या की थी : विष्णु देव साय

रायपुर/दिल्ली :  कांग्रेसी आज घूम-घूम कर संविधान बचाने की दुहाई दे रहे हैं. संविधान खत्म हो जाएगा कहकर दुष्प्रचार फैला रहे हैं. ये वही कांग्रेस है, जिसने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के तानाशाही नेतृत्व में देश में आपातकाल लगाया था. लोकतंत्र की हत्या की थी. भारतीयों की आवाज को दबाने का काम किया था. तथ्य यह है कि फिरंगियों-अंग्रेजों से गांधी-सुभाष के नेतृत्व में लड़कर हमें जो आजादी मिली थी, वह 1975 में हमने खो दी थी. भारत में आज जो आजादी है, वह जेपी-लोहिया-अटल-आडवाणी जैसे महापुरुषों की देन है. यह कांग्रेस से लड़ कर पाई गई आजादी है, कांग्रेस के शिकंजे से संविधान को मुक्त करा कर लाई गई आजादी है. ये बातें आपातकाल की 49वीं बरसी पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कही.

सीएम साय ने कहा कि भारत में एक सदी भर लम्बे संघर्षों और हजारों हुतात्माओं के बलिदान के बाद हमने आजादी पाई थी. आजादी उपरांत स्व. भीमराव अम्बेडकर ने हमें मौलिक अधिकारों के साथ ‘संविधान’ का उपहार दिया. बड़े ही त्याग और बलिदान से प्राप्त इस लोकतंत्र को कांग्रेस नेत्री तब की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आधी रात को खत्म कर देश को फिर से तानाशाही और गुलामी के उसी काल में धकेल दिया था, जहां से निकलकर 1947 में भारत वापस आया था. स्वतंत्र भारत के इतिहास में यह सबसे अलोकतांत्रिक काल था, जिसे लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने ‘भारतीय इतिहास की सर्वाधिक काली अवधि’ कहा है.

सीएम साय ने कहा कि कांग्रेस ने अपनी आजादी की विरासत को, तब ही खत्म कर दिया था जब लोकतंत्र की हत्या कर देश में आपातकाल लगाया था. भारतीय संविधान और लोकतंत्र आज के भाजपा (तब का भारतीय जनसंघ) के इतिहास पुरुष अटल-आडवाणी-नानाजी जैसे राष्ट्रवादियों का हासिल किया लोकतंत्र है. लोकनायक जयप्रकाश नारायण का कमाया लोकतंत्र है, जिसका आज हम आनंद ले रहे हैं.

विष्णु देव साय ने कहा कि आपातकाल भले 1977 में खत्म हो गया, लेकिन आपातकाल की मनोवृत्ति वाले तत्व और संगठन आज भी मौजूद हैं. हर क्षण-प्रतिपल लोकतंत्र विरोधी तत्वों के खतरे के प्रति सावधान रहने की जरुरत है. आपातकाल का यह इतिहास हमें इसलिए भी बार-बार हर बार स्मरण रखना चाहिए, ताकि ऐसा कलंकित इतिहास कभी अब फिर दुहराने का दुस्साहस कांग्रेस या वैसी मनोवृत्ति वाला कोई दल कभी अब करने में सफल नहीं हो पाए. सत्ता के मद में चूर होकर कांग्रेस जैसा कोई दल फिर से इस भयानक इतिहास को दुहराने का साहस नहीं कर पाए, इसलिए हमेशा सचेत रहने की जरुरत है.


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