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दो आईएएस और मेडिकल सुपरिंटेंडेट को हाई कोर्ट का अवमानना नोटिस, जानिए कौन हैं दो आईएएस जिनकी बढ़ने वाली है मुश्किलें - Somanshu News

दो आईएएस और मेडिकल सुपरिंटेंडेट को हाई कोर्ट का अवमानना नोटिस, जानिए कौन हैं दो आईएएस जिनकी बढ़ने वाली है मुश्किलें

दो आईएएस और मेडिकल सुपरिंटेंडेट को हाई कोर्ट का अवमानना नोटिस, जानिए कौन हैं दो आईएएस जिनकी बढ़ने वाली है मुश्किलें

बिलासपुर :  छत्तीसगढ़ के इकलौते सुपर स्पेशलिस्ट चिकित्सक डा प्रवेश शुक्ला, सिस्टम के भेंट चढ़ गए हैं। पीड़ा इस बात की है कि MBBS, MS(सर्जरी), Dr.NB (डॉक्टरेट ऑफ नेशनल बोर्ड सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी) सुपर स्पेशलिस्ट कोर्स की डिग्री है और वह गैस्ट्रोएंटरोलॉजी सर्जन के क्षेत्र में एक प्रसिद्ध चिकित्सक होने के साथ ही प्राइवेट प्रैक्टिस के बजाय उसने सरकारी अस्पताल में काम करने को प्राथमिकता दी। डीकेएस अस्पताल में अपनी सेवाएं दे रहे थे। कलंकपूर्ण आरोप लगाते हुए राज्य सरकार ने सेवा से बाहर कर दिया है। कलंकपूर्ण आदेश से व्यथित होकर डा शुक्ला ने राज्य शासन के फैसले को चुनौती देते हुए अधिवक्ता संदीप दुबे के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने राज्य शासन के आदेश काे निरस्त कर दिया था। कोर्ट के आदेश के बाद भी सेवा में बहाली नहीं की गई और ना ही बकाया सैलेरी का भुगतान किया। न्यायालयीन आदेश की अवहेलना करने के आरोप में डा शुक्ला ने दोबारा हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

अवमानना याचिका पर जस्टिस अरविंद्र कुमार वर्मा के सिंगल बेंच में सुनवाई हुई। कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए दो आईएएस अफसर व डीकेएस अस्पताल की मेडिकल सुपरिंटेंडेंट को अवमानना नोटिस जारी कर जवाब पेश करने कहा है। जारी नोटिस में कोर्ट ने पूछा है कि क्यों ना उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू की जाए। मामले की अगली सुनवाई के लिए कोर्ट ने अप्रैल 2025 के अंतिम सप्ताह में सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।

कोर्ट ने कुछ इस तरह की थी टिप्प्णी

पूर्व में दायर याचिका की सुनवाई के बाद कोर्ट ने अपने फैसले में गंभीर टिप्पणी की थी। कोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग के अफसरों के रवैये पर कड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने अपने फैसले में लिखा है कि यह एक कलंकपूर्ण आदेश है, जिसमें छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के उल्लंघन का स्पष्ट उल्लेख है। याचिकाकर्ता को विभागीय जांच में शामिल कर उसकी सुनवाई की जानी आवश्यक है, जो वर्तमान मामले में नहीं की गई है।


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