गंदा है पर धंधा है ये: बीएड-डीएड कॉलेजों की मनमानी फीस वसूली, एनसीईआरटी ने बनाई जांच टीम
4 दिसंबर तक करनी है जांच,लेकिन टीम अब तक कॉलेजों से नदारद,क्या चेंबर पर बैठे-बैठे होगी जांच!
जांजगीर-चांपा : डीएड और बीएड महाविद्यालय संचालकों ने शिक्षा को मुनाफे का धंधा बना लिया है। छात्रों से निर्धारित शुल्क से तीन गुना तक वसूली की जा रही है। सरकार द्वारा तय राशि की जगह महाविद्यालय 90,000 से 1,15,000 रुपये तक फीस ले रहे हैं। साथ ही, छात्रों को सिर्फ 30,000-40,000 रुपये की रसीद दी जाती है।इस मामले में छात्र अमित कुमार रजवाड़े ने डीएड-बीएड संघ के पदाधिकारियों के साथ कलेक्टर से शिकायत की थी। मीडिया में खबर के बाद एनसीईआरटी ने मामले पर संज्ञान लेते हुए जिला शिक्षा अधिकारी के नेतृत्व में जांच टीम गठित की। टीम को 4 दिसंबर तक जांच पूरी करनी है, लेकिन अब तक किसी भी कॉलेज में टीम नहीं पहुंची है। जबकि 48 घंटे से कम समय बचा हुआ है। ऐसे में जांच टीम के ऊपर कई सवालियां निशान उठ खड़े हुए हैं। क्या जिला शिक्षा अधिकारी अपने चेंबर में बैठे-बैठे ही महाविद्यालयों की जांच रिपोर्ट तैयार करेंगे? क्या छात्रों को इंसाफ नहीं मिल पाएगा? जो जांच की पारदर्शिता पर लाल निशान है। क्योंकि तीन ब्लॉक व चार कॉलेजो की जांच इतनी जल्द कैसे होगी?
इन महाविद्यालयों पर हैं आरोप
जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया कि , शिवशक्ति डीएड-बीएड कॉलेज खोरसी, ज्ञानदीप बीएड कॉलेज जांजगीर, राधाकृष्ण बीएड कॉलेज नवागढ़ और लाल बहादुर शास्त्री महाविद्यालय बलौदा पर अतिरिक्त शुल्क वसूली के आरोप हैं। जहां 4 दिसंबर तक जांच करने की जिम्मेदारी मिली हुई है। अभी जांच करने कॉलेज नहीं गए है।
छात्रों की शिकायत और आरोप
छात्र अमित कुमार रजवाड़े का आरोप है कि एनसीईआरटी द्वारा निर्धारित शुल्क 30 हजार 970 रुपए है, लेकिन कॉलेज प्रबंधन द्वारा 1 लाख रुपए से अधिक राशि की मांग की जा रही हैं। अतिरिक्त शुल्क नहीं देने पाने के कारण प्रवेश नहीं दिया गया। इसके अलावा कॉलेज में नान-अटेंडेंस होता नहीं है और सभी कॉलेज प्रबंधन पैसा कमाने के लिए नान-अटेंडेंस एडमिशन देते हैं। रेगुलर करने वाले छात्रों को एडमिशन नहीं देते। पूरे मामले का खुलासा तब हुआ ज़ब लाल बहादुर शास्त्री महाविद्यालय में प्रवेश के लिए पहुंचे छात्र ने मनमाने राशि की मांग का एक वीडियो बना लिया। जिसमें काउंटर के अंदर बैठा शख्स बीएड में प्रवेश के लिए 1 लाख 15 हजार रुपए की मांग कर रहा है। जिसकी शिकायत पीड़ित छात्र ने कलेक्टोरेट में की थी।
