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प्रदेश में नए बीएनएस कानून के तहत पहली सजा, हत्या के आरोपी को आजीवन कारावास - Somanshu News

प्रदेश में नए बीएनएस कानून के तहत पहली सजा, हत्या के आरोपी को आजीवन कारावास

प्रदेश में नए बीएनएस कानून के तहत पहली सजा, हत्या के आरोपी को आजीवन कारावास

बेमेतरा  : बेमेतरा जिला कोर्ट ने नए भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) कानून के तहत प्रदेश में पहली बार हत्या के एक आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह ऐतिहासिक फैसला बुधवार, 9 अप्रैल 2025 को सुनाया गया।

मामले में आरोपी ओम प्रकाश उर्फ रज्जू मंडावी को अपने दोस्त दिनेश यादव उर्फ दीनू की हत्या का दोषी पाया गया। कोर्ट ने आरोपी को आजीवन कारावास के साथ-साथ पांच हजार रुपये के अर्थदंड से भी दंडित किया है।

यह मामला बेरला थाना क्षेत्र का है, जहां हत्या का कारण रुपये का लेन-देन विवाद बताया गया है। घटना 16 जुलाई 2024 की है, जब प्रार्थी चेतन यादव ने बेरला थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। चेतन ने बताया कि प्रकाश डेली नीड्स के पास एक खाली प्लॉट में उसके चाचा दिनेश यादव का शव पड़ा हुआ था। मृतक के सिर पर ईंट से कई बार वार किए गए थे, जिससे उसकी मौत हो गई। पुलिस ने प्रार्थी की शिकायत पर बीएनएस की धारा 103(1) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

पुलिस ने अगले ही दिन, 17 जुलाई 2024 को आरोपी ओम प्रकाश उर्फ रज्जू मंडावी (उम्र 33 वर्ष, निवासी वार्ड नंबर 7, बेरला) को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में रज्जू ने बताया कि वह मृतक दिनेश को 8-10 साल से जानता था और दोनों के बीच पुराने रुपये का लेन-देन चल रहा था।

घटना वाले दिन रज्जू अपने दोस्तों के साथ शराब पी रहा था, तभी दिनेश वहां पहुंचा और अपने रुपये की मांग करने लगा। रज्जू ने एक-दो बार मना किया, लेकिन दिनेश के बार-बार मांगने पर उसे गुस्सा आ गया। गुस्से में उसने पास रखी ईंट से दिनेश पर हमला कर दिया और उसके सिर पर कई बार प्रहार किए, जिससे दिनेश की मौके पर ही मौत हो गई। हत्या के बाद रज्जू मौके से फरार हो गया था, लेकिन पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

नए बीएनएस कानून के तहत दर्ज इस मामले की सुनवाई बेमेतरा जिला कोर्ट में करीब 8 महीने तक चली। 1 जुलाई 2024 को पूरे देश और छत्तीसगढ़ में लागू हुए इस नए कानून के तहत यह प्रदेश का पहला मामला है, जिसमें सजा सुनाई गई है। बुधवार को कोर्ट ने आरोपी रज्जू को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास और पांच हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। यह फैसला नए बीएनएस कानून के प्रभावी क्रियान्वयन का एक उदाहरण माना जा रहा है, जो देश में आपराधिक न्याय प्रणाली को और सशक्त बनाने की दिशा में एक कदम है।


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