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अगस्त में शुरू करें ये खास खेती और पाएं कम खर्च में जबरदस्त मुनाफा लाखों रुपये की कमाई का सुनहरा मौका - Somanshu News

अगस्त में शुरू करें ये खास खेती और पाएं कम खर्च में जबरदस्त मुनाफा लाखों रुपये की कमाई का सुनहरा मौका

अगस्त में शुरू करें ये खास खेती और पाएं कम खर्च में जबरदस्त मुनाफा लाखों रुपये की कमाई का सुनहरा मौका

अगस्त का महीना खेती के लिए एक सुनहरा मौका लेकर आता है, खासकर उन लोगों के लिए जो कम खर्च में ज्यादा मुनाफा कमाना चाहते हैं। आज हम आपको दो ऐसी सब्जियों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें इस महीने बोने पर शानदार पैदावार और अच्छा भाव मिलता है। अगर आप सही समय और सही तरीके से खेती करेंगे, तो कुछ ही महीनों में लाखों की कमाई संभव है।

गाजर की खेती अगस्त में शुरू करने पर किसानों को बेहद अच्छा लाभ मिल सकता है। 25 अगस्त तक गाजर बोई जा सकती है और इससे लगभग 300 से 400 क्विंटल तक उत्पादन मिलने की संभावना रहती है। अगर मंडी में भाव ₹10 से ₹15 प्रति किलो भी मिले, तो तीन से चार लाख रुपये तक की आमदनी हो सकती है। गाजर की अच्छी पैदावार के लिए बलुई दोमट या दोमट मिट्टी का चयन करें। मिट्टी ढीली होनी चाहिए ताकि जड़ें सही से बढ़ सकें। भारी या जलभराव वाली मिट्टी में गाजर लगाने से नुकसान होता है। खेती करते समय 3 फीट की दूरी पर बेड बनाकर बुवाई करें ताकि बारिश का असर फसल पर न पड़े। खेत की तैयारी में प्रति एकड़ एक ट्रॉली गोबर की खाद डालें और गहरी जुताई करें। डीएपी, यूरिया, म्यूरिएट ऑफ पोटाश और फंगीसाइड का संतुलित इस्तेमाल भी करें। अगस्त से सितंबर तक देसी गाजर की बुवाई का समय उत्तम माना जाता है।

मूली की खेती भी अगस्त में किसानों को अच्छा फायदा देती है। अगर 15 अगस्त तक मूली बोई जाए तो अक्टूबर के आखिरी सप्ताह या नवंबर के पहले सप्ताह तक फसल तैयार हो जाती है। इस समय बाजार में भाव ₹10 से ₹15 प्रति किलो तक मिल जाता है। इसमें खर्च बहुत कम आता है और अधिक स्प्रे की जरूरत नहीं पड़ती। गोबर की पुरानी खाद एक ट्रॉली प्रति एकड़ पर्याप्त होती है। अगर पिछली फसल में ज्यादा खाद दी गई थी, तो दोबारा डालने की जरूरत नहीं होती। मूली की बुवाई के लिए खेत की मिट्टी को भुरभुरा बनाएं और 400 से 600 ग्राम प्रति एकड़ बीज 2 सेंटीमीटर की गहराई में बोएं। खरपतवार को समय-समय पर निकालते रहें। पूसा चेतकी वैरायटी अगस्त के लिए बेहतरीन मानी जाती है। साथ ही मूली की खेती के साथ धनिया, पालक और मेथी जैसी अन्य फसलें भी लगाकर अतिरिक्त आमदनी की जा सकती है।


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