जनवरी में लगा दें इन 5 सब्जियों की नर्सरी! मार्च-अप्रैल में होगी तगड़ी कमाई, जानें कैसे?
किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ अब सब्जियों की उन्नत खेती की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं. जनवरी का महीना इस लिहाज से बेहद अहम माना जाता है, क्योंकि इस समय तैयार की गई नर्सरी से फरवरी में रोपाई कर किसान बेहतर और मुनाफेदार पैदावार हासिल कर सकते हैं. हालांकि, सर्द मौसम के कारण नर्सरी तैयार करते समय कुछ विशेष सावधानियां बरतना जरूरी होता है, ताकि ठंड का असर पौधों पर न पड़े.
जनवरी में किसान टमाटर, फूलगोभी, बैंगन, खीरा, लौकी जैसी सब्जियों की नर्सरी आसानी से तैयार कर सकते हैं.
इन सब्जियों की अर्ली नर्सरी फरवरी के पहले सप्ताह में खेत में रोपित की जाती है, जिससे मार्च-अप्रैल में फसल जल्दी तैयार हो जाती है. खास बात यह है कि इस समय तक बाजार में पुरानी फसल लगभग समाप्त हो जाती है, जिससे देरी से आने वाली सब्जियों के दाम मंडी में काफी अच्छे मिलते हैं और किसानों की आय में तेज बढ़ोतरी होती है.
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी एवं प्रोफेसर डॉ. आई.के. कुशवाहा ने लोकल 18 को बताया कि जनवरी में सीधे खेत में पौध रोपित करने से ठंड के कारण गलन की समस्या आ जाती है. इसलिए बेहतर विकल्प यह है कि जनवरी में नर्सरी तैयार की जाए और फरवरी के प्रथम सप्ताह में पौधों की रोपाई की जाए. इससे पौधे मजबूत रहते हैं, जल्दी सर्वाइव करते हैं और जल्दी फलन मिलता है.
इन बातों का रखें ध्यान
नर्सरी को ठंड से बचाने के लिए किसान लो टनल या मिनी पॉलीहाउस तकनीक का उपयोग कर सकते हैं.इस विधि से तैयार की गई नर्सरी में तापमान नियंत्रित रहता है, जिससे पौधे स्वस्थ और निरोगी बनते हैं.टमाटर, फूलगोभी, बैंगन, खीरा और लौकी जैसी फसलें इस तकनीक के जरिए सफलतापूर्वक तैयार की जा सकती हैं.
नर्सरी को ठंड से बचाने के लिए किसान लो टनल या मिनी पॉलीहाउस तकनीक का उपयोग कर सकते हैं.इस विधि से तैयार की गई नर्सरी में तापमान नियंत्रित रहता है, जिससे पौधे स्वस्थ और निरोगी बनते हैं.टमाटर, फूलगोभी, बैंगन, खीरा और लौकी जैसी फसलें इस तकनीक के जरिए सफलतापूर्वक तैयार की जा सकती हैं.
लागत कम, मुनाफा ज्यादा
जनवरी में घर पर ही पॉलीहाउस के माध्यम से नर्सरी तैयार करने से बाहर से पौधे खरीदने का खर्च बचता है, जिससे लागत कम होती है और मुनाफा बढ़ता है.नर्सरी बनाते समय क्यारी की चौड़ाई लगभग ढाई से तीन मीटर रखनी चाहिए, जबकि लंबाई किसान अपनी सुविधा के अनुसार रख सकते हैं. इस तरह तैयार की गई नर्सरी जल्दी विकसित होती है और पौधे पूरी तरह स्वस्थ रहते हैं. कुल मिलाकर, अगर किसान जनवरी में वैज्ञानिक तरीके से नर्सरी तैयार कर फरवरी में रोपाई करते हैं, तो उन्हें न सिर्फ अच्छी पैदावार मिलती है, बल्कि यह तरीका उनकी आय बढ़ाने का भी मजबूत जरिया बन सकता है.
जनवरी में घर पर ही पॉलीहाउस के माध्यम से नर्सरी तैयार करने से बाहर से पौधे खरीदने का खर्च बचता है, जिससे लागत कम होती है और मुनाफा बढ़ता है.नर्सरी बनाते समय क्यारी की चौड़ाई लगभग ढाई से तीन मीटर रखनी चाहिए, जबकि लंबाई किसान अपनी सुविधा के अनुसार रख सकते हैं. इस तरह तैयार की गई नर्सरी जल्दी विकसित होती है और पौधे पूरी तरह स्वस्थ रहते हैं. कुल मिलाकर, अगर किसान जनवरी में वैज्ञानिक तरीके से नर्सरी तैयार कर फरवरी में रोपाई करते हैं, तो उन्हें न सिर्फ अच्छी पैदावार मिलती है, बल्कि यह तरीका उनकी आय बढ़ाने का भी मजबूत जरिया बन सकता है.
