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दिसंबर में लगा दें गुलंबरी गेहूं, दिखने में तांबे जैसी, उत्पादन सोना - Somanshu News

दिसंबर में लगा दें गुलंबरी गेहूं, दिखने में तांबे जैसी, उत्पादन सोना

दिसंबर में लगा दें गुलंबरी गेहूं, दिखने में तांबे जैसी, उत्पादन सोना

भारत कृषि प्रधान देश है और सरकार के द्वारा किसानों को आत्मनिर्भर बनाने उनकी आय बढ़ाने के लिए तमाम तरह की योजनाएं चलाई जा रही है. उन्हें पारंपरिक फसलों से हटकर नवाचार करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है सैकड़ो के साथ योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं नई-नई तकनीक से खेती कर रहे हैं नई-नई फसलों को आजमा रहे हैं. जिनमें उन्हें काफी सफलता मिल रही है तगड़ा मुनाफा कमा रहे हैं. लेकिन यह भी याद रखना होगा कि हमारे इस जीवन चक्र का आधार वही पारंपारिक फसले हैं, वहीं गेहूं है वही दाल है.
यह खेती का बेस है जिनकी जरूरत भी है. और इसी आधार को मजबूती देते हुए किसान भाई गेहूं तो उगाये लेकिन केवल बीज को बदल दें, बीज को बदलने मात्र से उनकी उपज तो बढ़ेगी ही साथ में इसके दाम भी बदल जाएंगे, और किसान का मुनाफा भी बढ़ जाएगा जिससे उतनी ही मेहनत उतने ही पानी उतनी ही जमीन में अच्छा लाभ मिल जाएगा.
सागर सहित बुंदेलखंड में पिछले साल की तुलना में 15 दिसंबर तक 70000 हेक्टेयर में कम गेहूं की बुवाई हुई है. ऐसे में किसान भाई 25 दिसंबर तक अगर अपने खेत अच्छी तरह से तैयार कर लेते हैं तो गेहूं की बुवाई कर सकते हैं. लेकिन उनके पास सिंचाई करने के लिए पानी के संसाधन होना चाहिए जिनके पास पानी की व्यवस्था है वो किसान ही गेहूं की बुवाई करें.
देशभर के किसानों के लिए रोल मॉडल बन किसान आकाश चौरसिया न सिर्फ मल्टी लेयर फार्मिंग से खेती करते हैं बल्कि वह 36 प्रकार के देसी गेहूं को भी उगाते हैं. उन्हें में से एक हरियाणा की गुलंबरी गेहूं है, इस वैरायटी का कलर तांबे जैसा दिखाई देता है और छोटा नुकीला गोल मटोल दाना होता है जिसकी वजह से इसके लिए गुलंबरी गेहूं कहा जाता है.
जिस तरह इस वैरायटी का नाम सुनने में सुंदर लग रहा है. वैसे ही इसके गुण भी बड़े कमाल के हैं. क्योंकि अगर इस गेहूं का आटा या दलिया के रूप में नियमित रूप से लंबे समय तक कोई व्यक्ति इस्तेमाल करता है, तो उसका नर्वस सिस्टम मजबूत होता है जो हमारी पूरे शरीर को कंट्रोल करता है, इन्ही गुणों की वजह से बाजार में इसके दाम₹6000 से लेकर₹7000 क्विंटल तक मिलते हैं डॉमेस्टिक मार्केट में इसकी खूब डिमांड है.
अगर किसान भाई गेहूं की इस वैरायटी की खेती करते हैं तो उन्हें कुछ भी अलग से करने की जरूरत नहीं रहती क्योंकि सबसे पहले सामान्य खेत की तरह ही इसको जुताई करके समतल बनाएं, फिर उर्वरक के साथ 60 से 70 किलो बीज मिलाकर प्रति एकड़ के हिसाब से बुवाई कर दें और सिंचाई चालू कर दें. 20 से 25 दिन का गेहूं होने के बाद फिर से उर्वरक का छिड़काव करें. 40 से 45 दिन में दूसरी सिंचाई और 60 से 65 दिन में तीसरी सिंचाई करें, चौथा पानी अगर है तो सिंचाई कर दे नहीं है तो कोई जरूरत नहीं. 105 दिन में यह वैरायटी पककर तैयार हो जाती है और इसे 18 से 20 क्विंटल प्रति एकड़ का उत्पादन मिलता है.

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