अब कोर पेपर को नजरअंदाज नहीं कर पाएंगे छात्र… Delhi University ने अपने Credit System में किया बड़ा बदलाव

अब कोर पेपर को नजरअंदाज नहीं कर पाएंगे छात्र… Delhi University ने अपने Credit System में किया बड़ा बदलाव

नई दिल्ली :  दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) ने स्नातक के प्रथम वर्ष के छात्रों के लिए प्रोन्नति के नियमों में बड़ा बदलाव किया है।

पहले जहां छात्रों को दूसरे वर्ष में जाने के लिए 14 में से सात पेपर पास करने होते थे, यानी उन्हें कुल 44 में से 22 क्रेडिट चाहिए होते थे। अब नए नियम के तहत छात्रों को 44 क्रेडिट में से कम से कम 28 क्रेडिट चाहिए होंगे।

पुरानी प्रणाली में सभी पेपरों का क्रेडिट वेटेज समान नहीं होने से असमानता बनी रहती थी। पुरानी व्यवस्था में छात्रों को सात पेपर पास करना अनिवार्य था। वह आसान पेपर चुनते थे और इससे अकादमिक गुणवत्ता प्रभावित हो रही थी।

डीन ऑफ एकेडमिक प्रो. के रत्नाबली ने कहा, छात्र दो-दो क्रेडिट के स्किल इन्हासमेंट कोर्स और वेल्यू एडेड कोर्स और चार क्रेडिट के जेनरिक इलेक्टिव कोर्स पढ़कर 50 प्रतिशत क्रेडिट अर्जित कर लेते थे। कोर पेपर पढ़ने पर ध्यान नहीं देते थे। अब ऐसा नहीं कर पाएंगे।

छात्रों को 28 क्रेडिट लाने के लिए चार-चार क्रेडिट के दो से तीन कोर पेपर पढ़ने होंगे। एक समेस्टर में वह 22 के साथ चार क्रेडिट का एक पेपर और पढ़ने की छूट थी। छात्र ऐसा भी कर लेंगे तो भी उन्हें दूसरे सेमेस्टर में दो क्रेडिट अर्जित करने ही होंगे।

एक वर्ष में कुल 44 क्रेडिट (प्रत्येक सेमेस्टर 22) उपलब्ध होते हैं। इस आधार पर छात्रों को लगभग 63.6 प्रतिशत क्रेडिट अर्जित करने होंगे, जबकि पहले 50 प्रतिशत पेपर पास करने से काम चल जाता था।

रामजस कालेज के प्राचार्य प्रो. अजय अरोड़ा ने कहा, “यह कदम छात्रों के लिए नुकसानदेह नहीं बल्कि फायदेमंद साबित होगा। अब छात्रों को अपने कोर्स को गंभीरता से लेना पड़ेगा और सभी के लिए समानता सुनिश्चित होगी।

” हालांकि, कुछ शिक्षकों ने इस बदलाव पर आपत्ति भी जताई। शिक्षा विभाग की प्रो. लतिका गुप्ता ने कहा, “छात्र उच्च क्रेडिट वाले पेपर चुनेंगे, जिससे अध्यापन का बोझ और बढ़ेगा। पहले से ही काॅलेज सुबह आठ से रात आठ बजे तक कक्षाओं को समेटने में जूझ रहे हैं।

अध्यापक और छात्र मशीन नहीं हैं, उन्हें पढ़ने और सोचने का भी समय चाहिए।” फिलहाल यह नियम केवल प्रथम वर्ष से द्वितीय वर्ष में प्रोन्नति पर लागू होगा, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि आगे चलकर इसे दूसरे और तीसरे वर्ष के लिए भी लागू किया जाएगा।


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