एक नहीं बुलेटप्रूफ कॉफी के हैं कई फायदे, वेट लॉस में भी है बेहद मददगार

एक नहीं बुलेटप्रूफ कॉफी के हैं कई फायदे, वेट लॉस में भी है बेहद मददगार

नई दिल्ली : बुलेटप्रूफ कॉफी हाल ही में हेल्थ और फिटनेस के प्रति जागरूक लोगों में काफी पॉपुलर हो गई है। खासतौर पर कीटो डाइट फॉलो करने वाले लोग इसे अपनी डाइट में शामिल कर रहे हैं।

यह हाई-फैट कॉफी शरीर को इंस्टेंट एनर्जी देने के साथ-साथ मेंटल फोकस को भी बढ़ाती है। लेकिन क्या वाकई दिन की शुरुआत बुलेटप्रूफ कॉफी से करना फायदेमंद है? तो आइए जानते हैं कि ये आखिर क्या है, इसके फायदे क्या हैं और क्या इसे सुबह खाली पेट लेना सही है सबकुछ के बारे में-

बुलेटप्रूफ कॉफी क्या है?
बुलेटप्रूफ कॉफी एक खास तरह की कॉफी है, जिसमें ब्लैक कॉफी, ग्रास-फेड अनसाल्टेड बटर और MCT (मीडियम चेन ट्राइग्लिसराइड्स) ऑयल का मिक्सचर होता है। इसे ब्लेंड करके झागदार और क्रीमी बनाया जाता है, जिससे यह नॉर्मल कॉफी से अधिक टेस्टी और न्यूट्रीशियस हो जाती है। यह खासतौर पर उन लोगों के लिए डिजाइन की गई है, जो इंटरमिटेंट फास्टिंग करते हैं या कीटो डाइट फॉलो कर रहे हैं।

बुलेटप्रूफ कॉफी के फायदे
इंस्टेंट एनर्जी सोर्स- MCT ऑयल जल्दी पचकर शरीर को इंस्टेंट एनर्जी देता है, जिससे आप दिनभर एक्टिव रहते हैं।
ब्रेन फंक्शन में सुधार- MCT ऑयल और हेल्दी फैट ब्रेन को तुरंत एनर्जी देते हैं, जिससे फोकस और कॉन्सेंट्रेशन बेहतर होता है।
वेट लॉस करने में सहायक- यह फैट बर्निंग को तेज करता है और लंबे समय तक पेट भरा रखता है, जिससे कैलोरी का सेवन कम होता है।
इंसुलिन स्पाइक से बचाव- इसमें कार्ब्स न होने के कारण ब्लड शुगर लेवल स्थिर रहता है, जो डायबिटीज पेशेंट्स के लिए फायदेमंद हो सकता है।
इंटरमिटेंट फास्टिंग में सहायक- इसे लेने से भूख देर से लगती है और यह फास्टिंग विंडो को बढ़ाने में मदद करता है।
 
क्या दिन की शुरुआत बुलेटप्रूफ कॉफी से करनी चाहिए?यदि आप कीटो डाइट पर हैं या इंटरमिटेंट फास्टिंग का पालन कर रहे हैं, तो बुलेटप्रूफ कॉफी सुबह के समय आपकी परफेक्ट साथी हो सकती है। यह भूख को कंट्रोल रखती है और फैट बर्निंग को तेज करती है। लेकिन अगर आप हाई-कार्ब डाइट पर हैं या फैट्स को पचाने में कठिनाई होती है, तो इसे रोजाना लेना नुकसानदायक हो सकता है।

किसे सावधानी बरतनी चाहिए

  1. हाई कोलेस्ट्रॉल- जिन लोगों का कोलेस्ट्रॉल लेवल ज्यादा है, उन्हें इसे लेने से बचना चाहिए।
  2. डाइजेशन संबंधी समस्या में- फैट की अधिक मात्रा से कुछ लोगों को गैस, एसिडिटी या पेट की समस्या हो सकती है।

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