NBFC और माइक्रोफाइनेंस कंपनियों को अधिक कर्ज दे सकेंगे बैंक, RBI से मिली बड़ी राहत
आरबीआई ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन सूक्ष्म वित्त ऋणों को उपभोक्ता कर्ज की श्रेणी में नहीं रखा गया है और जो कुछ नियामकीय मानकों को पूरा करते हैं, उन्हें नियामकीय खुदरा पोर्टफोलियो (Regulatory Retail Portfolio – RRP) में शामिल किया जा सकता है। हालांकि, इसके लिए बैंकों को उचित नीतियां और संचालन प्रक्रियाएं लागू करनी होंगी।
इसके अलावा, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRB) और स्थानीय क्षेत्र बैंक (LAB) द्वारा दिए गए माइक्रोफाइनेंस ऋणों पर 100% जोखिम भारांश लागू रहेगा।
RBI के फैसले का क्या होगा असर?
- एनबीएफसी और माइक्रोफाइनेंस कंपनियों के लिए ऋण प्रवाह में वृद्धि होगी।
- बैंकों को कम पूंजी अलग रखने की जरूरत होगी, जिससे वे अधिक लोन देने में सक्षम होंगे।
- छोटे कर्ज लेने वाले व्यवसायों और ग्राहकों को लाभ मिलेगा।
इक्रा के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट अनिल गुप्ता ने कहा, “इस क्षेत्र में मौजूदा प्रतिकूल परिस्थितियों को देखते हुए यह एक स्वागतयोग्य कदम है। इससे संबंधित कंपनियों को राहत मिलेगी और ऋण प्रवाह में तेजी आएगी।”
