यूरिया-नाइट्रोजन का झंझट छोड़िए! धान की रोपाई के वक्त करें ये आसान जुगाड़, खेत लहलहाएंगे

यूरिया-नाइट्रोजन का झंझट छोड़िए! धान की रोपाई के वक्त करें ये आसान जुगाड़, खेत लहलहाएंगे

धान की खेती में अच्छी पैदावार के लिए किसान अक्सर यूरिया और नाइट्रोजन पर ही निर्भर रहते हैं। लेकिन बार-बार इनका छिड़काव महंगा पड़ता है और मिट्टी की सेहत पर भी असर डालता है। ऐसे में किसान सोचते हैं कि क्या बिना यूरिया और नाइट्रोजन के भी धान की खेती की जा सकती है? कृषि वैज्ञानिकों का कहना है– हां, बिल्कुल! बस रोपाई के वक्त एक खास जुगाड़ अपना लीजिए और फिर देखिए धान की फसल लहलहाते हुए।

यूरिया की किल्लत से परेशान किसान

इन दिनों यूरिया खाद की किल्लत से किसान खासे परेशान हैं। समय पर खाद न मिलने से धान की फसल पर असर पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि अगर यूरिया यानी नाइट्रोजन की कमी हुई, तो उत्पादन भी घट जाएगा।इसी बीच कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को एक ऐसा आसान उपाय सुझाया है, जिससे न केवल यूरिया पर खर्च घटेगा, बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी लंबे समय तक बनी रहेगी।

कैसे करेगा नील हरित शैवाल कमाल?

कृषि विज्ञान केंद्र नियामतपुर के कृषि विशेषज्ञ डॉ. एन. पी. गुप्ता बताते हैं कि धान की फसल को अच्छी पैदावार के लिए करीब 120-125 किलो नाइट्रोजन की जरूरत होती है। इसके लिए किसान यूरिया डालते हैं। लेकिन एक सच यह भी है कि वायुमंडल में करीब 78% नाइट्रोजन मौजूद है, जिसे पौधे सीधे इस्तेमाल नहीं कर सकते। यहीं पर नील हरित शैवाल (Blue Green Algae) किसान का मददगार बन जाता है। यह शैवाल वातावरण में मौजूद नाइट्रोजन को खींचकर पौधों के लिए उपलब्ध कराता है। यानी किसानों को अलग से यूरिया डालने की जरूरत नहीं पड़ती।

ऐसे करें नील हरित शैवाल का उपयोग

स्टेप 1: धान की रोपाई के 7 से 10 दिन बाद, खेत में नमी बनाए रखें।
स्टेप 2: प्रति एकड़ खेत में 5 किलो नील हरित शैवाल बिखेर दें।
स्टेप 3: खेत को सूखने न दें। नमी बनी रहनी चाहिए। ऐसा करने से पौधे धीरे-धीरे वायुमंडल से नाइट्रोजन लेने लगेंगे और फसल को लगातार पोषण मिलता रहेगा।

फायदा क्या होगा?

  1. यूरिया पर होने वाला खर्च बचेगा।
  2. मिट्टी की सेहत सुधरेगी और उसकी उर्वरता लंबे समय तक बनी रहेगी।
  3. धान की पैदावार पर असर नहीं पड़ेगा, बल्कि लागत घटने से मुनाफा बढ़ेगा।

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