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IND vs SA: साउथ अफ्रीका के खिलाफ फिर सामने आई टीम इंडिया की बड़ी कमी, पहले भी हुआ है नुकसान, नजरअंदाज क्यों कर रहे हैं गंभीर? - Somanshu News

IND vs SA: साउथ अफ्रीका के खिलाफ फिर सामने आई टीम इंडिया की बड़ी कमी, पहले भी हुआ है नुकसान, नजरअंदाज क्यों कर रहे हैं गंभीर?

IND vs SA: साउथ अफ्रीका के खिलाफ फिर सामने आई टीम इंडिया की बड़ी कमी, पहले भी हुआ है नुकसान, नजरअंदाज क्यों कर रहे हैं गंभीर?

नई दिल्ली: भारत और साउथ अफ्रीका के बीच जब टेस्ट सीरीज का एलान हुआ था और जब से सीरीज शुरू होने वाली थी तो सभी का मानना था कि टीम इंडिया का पलड़ा साउथ अफ्रीका पर भारी है। सीरीज का पहला टेस्ट मैच कोलकाता में खेला गया और ढाई दिन में खत्म हो गया। विजेता बनी मेहमान टीम। इस हार के बाद फिर टीम इंडिया की एक कमी उजागर हो गई है जिसकी तरफ लगता है गौतम गंभीर ध्यान नहीं दे रहे हैं।

ये कमी है भारतीय बल्लेबाजों का स्पिनरों के खिलाफ खराब खेल। एक समय हुआ करता था जब स्पिनरों को खेलना टीम इंडिया की ताकत होती थी। दूसरे देश के बल्लेबाज भारतीय बल्लेबाजों को देख स्पिनरों को खेलने की कला सीखते थे। अब हालात उलटे हैं क्योंकि अब भारतीय बल्लेबाज स्पिनरों के सामने बेबस नजर आने लगे हैं।

कोलकाता टेस्ट मैच में भारत के कुल 18 विकेट गिरे। कप्तान शुभमन गिल चोट के चलते बल्लेबाजी करने नहीं आए। इन 18 में से 12 विकेट स्पिनरों ने लिए। ये बताता है कि भारतीय बल्लेबाज स्पिनरों को अच्छे से खेल नहीं पाए। ये पहली बार नहीं है। न्यूजीलैंड सीरीज इसका उदाहरण है जहां मिचेल सैंटनर और एजाज के अलावा पार्ट टाइम स्पिनर ग्लेन फिलिप्स के सामने भारतीय टीम के दिग्गज बल्लेबाज भी परेशान हुए और टीम को तीन मैचों की टेस्ट सीरीज में एक भी जीत नहीं मिली।

गंभीर ने किया नजरअंदाजगंभीर तकरीबन डेढ़ साल से कोच हैं और न्यूजीलैंड ने जब भारत को भारत में हराया था तब भी वह कोच हैं। लेकिन अभी तक उनका ध्यान इस बात पर नहीं गया है कि भारतीय बल्लेबाज स्पिन को खेलने में कमजोर साबित हो रहे हैं। ये इसलिए कहा जा रहा है कि गंभीर ने कोलकाता में स्पिनरों की मददगार पिच बनावाई और चार स्पिनर लेकर उतरे। इन चार में से दो- वॉशिंगटन सुंदर और अक्षर पटेल ऑलराउंडर थे। गंभीर ने सुंदर को टेस्ट में नंबर-3 पर उतारा। सुंदर कितने भी अच्छे बल्लेबाज हों लेकिन टेस्ट में नंबर-3 जैसी पोजिशन पर कोई विशेषज्ञ को नजरअंदाज करना बड़ी गलती है।

गंभीर इतने दिनों से देख रहे हैं कि उनकी युवा टीम स्पिनरों के सामने सहज नहीं है फिर भी उनका स्पिनरों की मददगार पिच मांगना बताता है कि वह इस कमी पर ध्यान ही नहीं दे रहे हैं। उनकी नजर में उनके बल्लेबाजों की स्पिन खेलने की तकनीक में कोई कमी नहीं है। ये हैरान करने वाली बात है।

अभी भी है समयगंभीर के फैसले शुरू से ही क्रिकेट के जानकारों की समझ में नहीं आ रहे हैं। साउथ अफ्रीका के खिलाफ भी यही हाल हुआ। कम से कम अब तो गंभीर को समझना होगा कि उनके बल्लेबाज फिरकी के फेर में फंसते हैं और इसमें सुधार की जरूरत है। अगर सुधार नहीं होता है तो फिर ऐसे बल्लेबाज चुने जाएं जो स्पिन को अच्छा खेलते हैं। अभी भी गंभीर के पास समय है क्योंकि आईसीसी विश्व चैंपियनशिप की रेस अभी शुरू हुई है।

भारत को अगले कुछ मैच स्पिनरों की मुफीद पिचों पर ही खेलना है। साउथ अफ्रीका के बाद भारत को श्रीलंका दौरे पर जाना है और वहां भी स्पिनरों की मददगार पिचें मिलेंगी और श्रीलंका के पास उन पिचों के हिसाब से स्पिनर भी अच्छे होंगे जो भारत को परेशानी में डाल सकता है।

टीम इंडिया लगातार दो बार टेस्ट चैंपियनशिप का फाइनल खेलने के बाद पिछले साल इससे चूक गई थी। इस बार टीम इंडिया चाहेगी कि वह फाइनल खेले और इसके लिए जरूरी है कि बतौर कोच गंभीर टीम की कमियों पर जल्दी पूरा करें फिर चाहे टीम में बदलाव ही क्यों न करने पड़ें।


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