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यहां महापौर के 9 तो पार्षदों के 171 उम्मीदवार मैदान में.. नहीं माने नाराज निर्दलीय तो बिगड़ जाएगा भाजपा-कांग्रेस का समीकरण - Somanshu News

यहां महापौर के 9 तो पार्षदों के 171 उम्मीदवार मैदान में.. नहीं माने नाराज निर्दलीय तो बिगड़ जाएगा भाजपा-कांग्रेस का समीकरण

यहां महापौर के 9 तो पार्षदों के 171 उम्मीदवार मैदान में.. नहीं माने नाराज निर्दलीय तो बिगड़ जाएगा भाजपा-कांग्रेस का समीकरण

रायगढ़: रायगढ़ नगर निगम चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशियों की बड़ी संख्या ने भाजपा और कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इस सीट पर मेयर पद के लिए भाजपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के अलावा छह निर्दलीय प्रत्याशी भी चुनावी मैदान में हैं। वहीं, 48 वार्डों के पार्षद पद के लिए कुल 171 प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल किया है।

रायगढ़ नगर निगम चुनाव 2025

171 उम्मीदवार मैदान में

नामांकन प्रक्रिया के बाद स्क्रूटनी में केवल दो आवेदन निरस्त किए गए हैं, जिससे अब 171 उम्मीदवार चुनावी मुकाबले में बने हुए हैं। निर्दलीय प्रत्याशियों की इतनी बड़ी संख्या ने दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों की चिंता बढ़ा दी है। यदि नाराज कार्यकर्ता नाम वापस नहीं लेते हैं, तो यह भाजपा और कांग्रेस के लिए चुनौतीपूर्ण स्थिति उत्पन्न कर सकता है।

2014 के नगर निगम चुनावों में निर्दलीय प्रत्याशी ने मेयर पद पर जीत दर्ज की थी, जबकि बसपा सहित नौ निर्दलीय पार्षद भी चुनाव जीतकर आए थे। इससे भाजपा और कांग्रेस दोनों के राजनीतिक समीकरण प्रभावित हुए थे। इसी इतिहास को देखते हुए, इस बार भी दोनों दल डैमेज कंट्रोल की रणनीति पर काम कर रहे हैं।

नाराज हैं कार्यकर्ता

कांग्रेस लगातार नाराज कार्यकर्ताओं से संपर्क कर रही है और उन्हें मनाने के प्रयास में जुटी हुई है। पार्टी पदाधिकारियों का कहना है कि जो कार्यकर्ता असंतुष्ट होकर निर्दलीय रूप से मैदान में उतरे हैं, उन्हें समझाकर नामांकन वापस लेने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। कांग्रेस का मानना है कि जनता ने निर्दलीय मेयर और कांग्रेस सरकार दोनों का कार्यकाल देखा है और इस बार विकास को प्राथमिकता देते हुए कांग्रेस को समर्थन देगी।

दूसरी ओर, भाजपा भी अपनी रणनीति पर काम कर रही है और कार्यकर्ताओं की नाराजगी को नकार रही है। पार्टी के अनुसार, टिकट वितरण में देरी के कारण कई कार्यकर्ताओं ने नामांकन दाखिल किया था, लेकिन अब वे अपने आवेदन वापस ले रहे हैं। भाजपा का दावा है कि निर्दलीय प्रत्याशियों से उसे कोई विशेष खतरा नहीं है और पार्टी पूरी एकजुटता के साथ चुनाव लड़ेगी।

अब सभी की निगाहें नाम वापसी की अंतिम तारीख पर टिकी हैं। यदि निर्दलीय प्रत्याशी अपनी उम्मीदवारी बरकरार रखते हैं, तो यह चुनाव भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए कड़ी परीक्षा साबित हो सकता है।

 


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