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झूठ बोलकर 28 साल छोटी युवती से की शादी, हाई कोर्ट ने कहा- अब इस रिश्ते को पुनर्जीवित करना मुश्किल… - Somanshu News

झूठ बोलकर 28 साल छोटी युवती से की शादी, हाई कोर्ट ने कहा- अब इस रिश्ते को पुनर्जीवित करना मुश्किल…

झूठ बोलकर 28 साल छोटी युवती से की शादी, हाई कोर्ट ने कहा- अब इस रिश्ते को पुनर्जीवित करना मुश्किल…

बिलासपुर :  अच्छे घर में रिश्ता तय करने के लिए लड़के के घर वालों के साथ ही लड़के ने भी सफेद झूठ बोला। लड़का ने अपने आपको शासकीय सेवक बता दिया। घर वालों ने अपने बेटे की उम्र छुपा दी। उम्र छुपाने के साथ ही 28 साल छोटी युवती से शादी कर ली। झूठ के बुनियाद पर शादी रचाने के बाद पति पत्नी को और सास ससुर बहु को प्रताड़ित भी करने लगे। प्रताड़ना से तंग आकर महिला मायके आ गई। बीते 13 साल से पति पत्नी अलग जीवन बिता रहे हैं।

महिला ने विवाह विच्छेद के लिए परिवार न्यायालय में वाद दायर किया था। परिवार न्यायालय ने तलाक की अनुमति नहीं देते हुए महिला के आवेदन को खारिज कर दिया। परिवार न्यायालय के फैसले को महिला ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। मामले की सुनवाई जस्टिस रजनी दुबे व जस्टिस संजय कुमार जायसवाल की डिवीजन बेंच में हुई। सुनवाई के बाद डिवीजन बेंच ने परिवार न्यायालय के फैसले को खारिज कर महिला को तलाक लेने की मंजूरी दे दी है। कोर्ट ने जब पूरा वाकया सुना तो यह भी टिप्पणी की कि अब इस रिश्ते को दोबारा पुनर्जीतिक करना संभव नहीं है।

क्या है मामला

जांजगीर-चांपा जिले की निवासी महिला की शादी मई 2011 में जांजगीर जिले के ही एक व्यक्ति से हुई थी। शादी के समय महिला की उम्र 18 वर्ष थी। महिला ने अपनी याचिका में बताया है कि ससुराल पक्ष के लोगों ने गलत उम्र बताकर 28 वर्ष बड़े व्यक्ति से उसकी शादी करा दी। पति सरकारी नौकरी में भी नहीं है। झूठी जानकारी देकर भरमाया गया है। याचिका में इस बात की भी जानकारी दी है कि शादी के तत्काल बाद पति और ससुराल पक्ष के लोग प्रताड़ित करने लगे थे। झूठ फरेब और प्रताड़ना से तंग आकर वह मायके आ गई थी। तब से वह अपने मायके में ही रह रही है।

परिवार न्यायालय ने दिया था ऐसा फैसला

विवाह विच्छेद के आवेदन पर सुनवाई करते हुए परिवार न्यायालय ने महिला के आवेदन को खारिज कर दिया था। न्यायालय ने महिला को दो महीने के भीतर पति के साथ रहने अपने ससुराल जाने का आदेश दिया था। परिवार न्यायालय के दोनों ही फैसले को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट के डिवीजन बेंच ने महिला की याचिका को स्वीकार करते हुए तलाक की मंजूरी दे दी है। साथ ही परिवार न्यायालय के दोनों ही फैसले को रद कर दिया है।


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