EOW के अफसरों पर फर्जी दस्तावेज और बयान में छेड़छाड़ का आरोप, चार नवंबर को होगी अगली सुनवाई
रायपुर : आर्थिक अपराध शाखा (EOW) के तीन अफसरों के खिलाफ फर्जी दस्तावेज तैयार करने और धारा 164 के बयान में छेड़छाड़ करने के आरोप पर शनिवार को सुनवाई हुई। कांग्रेस नेता गिरीश देवांगन की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई की गई। रायपुर की सीनियर डिवीजन सिविल जज आकांक्षा बेक की अदालत में हुई सुनवाई में दोनों पक्षों ने अपनी दलीलें पेश की। कोर्ट ने कहा कि अब इस मामले में अधिकारियों की आपत्ति पर सुनवाई चार नवंबर को की जाएगी।
वहीं उन्होंने आगे कहा कि यह पूरी शिकायत राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित है। इसमें राज्य के कुछ बड़े नेताओं का नाम आने की संभावना थी, इसलिए जांच को प्रभावित करने और प्रेस कांफ्रेंस के जरिए राजनीतिक माहौल बनाने के लिए यह परिवाद दाखिल किया गया है। अगर 164 के बयान में कोई त्रुटि होती भी है, तो उसे वही कोर्ट देखता है जहां वह बयान पेश किया गया था। किसी अन्य अदालत को यह अधिकार नहीं है कि वह जांच करे कि बयान सही था या नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि निखिल चंद्राकर ने खुद मजिस्ट्रेट के सामने आवेदन दिया था, ऐसे में पुलिस की भूमिका पर सवाल नहीं उठाया जा सकता।
वहीं रिजवी ने कहा कि हमने न्यायालय के समक्ष सुप्रीम कोर्ट के विनोद पांडे प्रकरण का हवाला दिया है, जिसमें कहा गया था कि यदि कोई एजेंसी झूठे साक्ष्य तैयार करती है, तो उस पर एफआइआर दर्ज की जानी चाहिए। अब अदालत को यह तय करना है कि ईओडब्ल्यू के अधिकारियों ने यह कार्य अपनी ऑफिशियल ड्यूटी में किया या ऑफ ड्यूटी। यदि यह जानबूझकर फर्जी साक्ष्य तैयार करने का मामला है, तो सैंक्शन का सवाल ही नहीं उठता।
