भुईयां ऐप हैकिंग मामला: जालसाजी में बड़े सिंडिकेट के शामिल होने का संदेह

भुईयां ऐप हैकिंग मामला: जालसाजी में बड़े सिंडिकेट के शामिल होने का संदेह

भिलाई :  राजस्व विभाग के सरकारी खसरे नंबर से फर्जीवाड़े का मामले में बड़े सिंडिकेट के शामिल होने की आशंका जताई जा रही है। प्रकरण में जांच के बाद बड़े लोगों के शामिल होने का भी शक है।

प्रकरण के खुलासे के बाद दो पटवारियों पर कार्रवाई की गई है। नंदिनी पुलिस के मुताबिक, इस फर्जीवाड़ा का मास्टर माइंड सुंदर नगर वार्ड सिलतरा रायपुर निवासी दीनू यादव है। ग्राम अच्छोटी निवासी एस राम बंजारे, सेक्टर 5 नंद किशोर साहू भी इसमें शामिल है।

बताया गया है कि राजस्व विभाग के पोर्टल को आरोपियों द्वारा हैक कर सरकारी खसरा नंबर अपलोड कर जमीन को अपना बताया गया। जब लोन के लिए सारे दस्तावेज भी फर्जी तरीके से दीनू ने तैयार कर लिए। फिर फर्जी तरीके से भारतीय स्टेट बैंक शाखा नंदिनी नगर से 36 हजार रुपए आहरण किया। बैंक से रकम निकालने वाले आरोपी दिनू राम यादव, एसराम बंजारे ने साजिश रचते हुए राजस्व विभाग में फर्जीवाड़ा किया। दस्तावेज तैयार कर जमीन के नाम पर लोन के लिए बैंक में दस्तावेज जाम कर रुपए निकालकर 20 लाख 26 हजार 547 रुपए को नन्द किशोर साहू के खाते में ट्रांसफर कर दिया। भनक लगते ही दीनू और एस राम बंजारे फरार है। आरोपियों ने किस तरह राजस्व विभाग में फर्जीवाडा किया है। दीनू के पकड़े जाने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। फिलहाल पुलिस जांच में जुटी हुई है।

कई लोगों के शामिल होने की आशंका
पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि जिले के राजस्व विभाग के पोर्टल को हैक कर फर्जीवाड़ा करने में बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा था। इसके लिए साजिश रची गई। बताया जा रहा है कि इसमें तीन नहीं, बल्कि नीचे से लेकर ऊपर तक सभी शामिल होने का अंदेशा से इंकार नहीं किया जा सकता है। इस फर्जीवाड़े में कई बड़े नामों के खुलासे हो सकते हैं। पुलिस के मुताबिक दिनूराम यादव ने 25 जून 2025 को एसबीआई नंदनी टाउनशिप ब्रांच से 46 लाख का लोन लिया। 2 जुलाई को एक अन्य व्यक्ति ने कुम्हारी ब्रांच से 36 लाख रुपए का लोन लिया है। मामला संभाग आयुक्त के पास पहुंचा तो एसडीएम ने भुईया ऐप में गड़बड़ी सुधारी। मुरमुंदा पटवारी हल्का के चार गांवों में यह फर्जीवाड़ा सामने आया है।

जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा
नंदिनी थाना के प्रभारी पारसनाथ ठाकुर ने बताया कि, पोर्टल में सरकारी खसरा नंबर का उपयोग कर फर्जीवाडा किया गया है, उस नाम से जमीन ही नहीं है। फरार दीनू के पकड़े जाने के बाद ही पूरा खुलासा हो पाएगा। फिलहाल पुलिस जांच की जा रही है।


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