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मंत्री ने किया भूमिपूजन… और 15 दिन में ही प्रोजेक्ट पर ब्रेक! DFO की कड़ाई से कोरबा में राजनीतिक तूफ़ान - Somanshu News

मंत्री ने किया भूमिपूजन… और 15 दिन में ही प्रोजेक्ट पर ब्रेक! DFO की कड़ाई से कोरबा में राजनीतिक तूफ़ान

मंत्री ने किया भूमिपूजन… और 15 दिन में ही प्रोजेक्ट पर ब्रेक! DFO की कड़ाई से कोरबा में राजनीतिक तूफ़ान

कोरबा: कोरबा आज सुबह-सुबह एक ऐसे फैसले से हिल गया, जिसने न सिर्फ प्रशासनिक गलियारों में सन्नाटा बिठा दिया, बल्कि राजनीति की गर्मी को भी चरम पर पहुँचा दिया। बालको के सेक्टर-6 में तैयार हो रहे G-9 बहुमंजिला भवन प्रोजेक्ट पर अचानक जिला वन अधिकारी प्रेमलता यादव ने तुरंत प्रभाव से रोक लगा दी। यह वही प्रोजेक्ट है जिसका भव्य भूमिपूजन केवल 15 दिन पहले श्रम एवं उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने किया था। रोक के आदेश के साथ ही कोरबा की राजनीति में हलचल बढ़ गई है और लोग एक ही सवाल पूछ रहे हैं—”क्या ये विकास को रोकने की साज़िश है या नियमों की सचमुच उड़ाई जा रही थीं धज्जियाँ?”

सूत्रों के अनुसार विवाद की नींव उस समय पड़ी जब पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने प्रोजेक्ट पर गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री और कलेक्टर को शिकायत भेजी। उन्होंने बालको प्रबंधन पर वन संरक्षण कानून, राजस्व नियम, पर्यावरणीय अनुमतियों और नगर नियोजन अधिनियम तक की अनदेखी का आरोप लगाया। इतना ही नहीं, अग्रवाल का कहना है कि प्रोजेक्ट के नाम पर लोक मार्ग अवरुद्ध किए जा रहे हैं, और बिना किसी वैधानिक अनुमति के नौ मंजिला भवन खड़ा किया जा रहा है। उनके आरोपों के बाद डीएफओ ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए बालको प्रबंधन और निर्माण कर रही आलुवालिया कंपनी के नाम कड़ा नोटिस जारी कर दिया।

डीएफओ प्रेमलता यादव के आदेश ने पूरे विवाद की आग में घी डालने का काम किया है। उन्होंने न सिर्फ निर्माण को पूरी तरह रोकने का आदेश दिया है, बल्कि शिकायत की जांच के लिए विशेष जांच टीम भी गठित कर दी है। यह कार्रवाई बालको प्रबंधन के लिए बड़ा झटका साबित हो रही है, क्योंकि कंपनी कई महीनों से प्रोजेक्ट को विकास का प्रतीक बताकर आगे बढ़ा रही थी। अब जांच टीम के सामने सबसे बड़ा सवाल यही होगा कि क्या पूर्व मंत्री के आरोपों में दम है या रोक का फैसला महज़ राजनीतिक दबाव का परिणाम।

उधर, जिले की राजनीति इस घटना के बाद से पूरी तरह तप चुकी है। एक तरफ पूर्व मंत्री अग्रवाल इसे “नियमों को बचाने की लड़ाई” बता रहे हैं, वहीं मंत्री लखनलाल देवांगन के समर्थक इसे “सत्ता के काम में बाधा डालने की साज़िश” के रूप में देख रहे हैं। वे सवाल उठा रहे हैं कि अगर सब कुछ गलत था तो भूमिपूजन के वक्त किसी विभाग ने आपत्ति क्यों नहीं उठाई? वहीं अग्रवाल समर्थक तर्क दे रहे हैं कि “भव्य मंच और राजनीतिक चमक के बीच नियमों की अनदेखी दबा दी गई थी।”
फिलहाल कोरबा में एक ही चर्चा है—क्या बालको के G-9 प्रोजेक्ट पर गिरी रोक भविष्य में किसी बड़े एक्शन को जन्म देगी? क्या वन विभाग की जांच प्रोजेक्ट को हरी झंडी देगी, या फिर यह विवाद कोरबा की राजनीति को लंबे समय तक गर्माए रखेगा? एक बात तय है—कोरबा का यह विवाद आने वाले दिनों में शहर से लेकर राजधानी रायपुर तक हलचल मचाने वाला है।


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