WordPress database error: [Out of range value for column 'id' at row 1]
INSERT INTO `GUVAl_visitors_stat` (`time`, `ip`) VALUES ('1786074372', '216.73.217.7')

सेंट्रल जेल रायपुर में आत्महत्याओं का सिलसिला,जानिए वजह? - Somanshu News

सेंट्रल जेल रायपुर में आत्महत्याओं का सिलसिला,जानिए वजह?

सेंट्रल जेल रायपुर में आत्महत्याओं का सिलसिला,जानिए वजह?

 

रायपुर : जनवरी माह में अफ्रीकन कैदी पैट्रिक ने आत्महत्या कर ली थी, इसी हप्ते ओमप्रकाश नामक कैदी ने रायपुर सेंट्रल जेल में आत्महत्या कर ली  । जेल की ये ना कोई पहली घटना है ना आखिरी जेल की व्यवस्थाओं में मानवाधिकार का कोई स्थान ही नही है,अपराध से घृणा करो अपराधी से नही का निर्देश मानने जेल प्रशासन तैयार ही नही है ,जिन कैदी हवालातियों के पास संसाधन होते है चढ़ावा देने में सक्षम होते है ,वों चहेते होते हैं,क्योंकी उनकी तूती बोलती है । गैंगवार,कटनी चलना आम बात है,कैदी नारद देवांगन आत्मज कोमल 30/1/2025 हवालाती सोहन उर्फ़ मोहन आत्मज देवनारायण 20/03/2025 हवालाती मेहरान उर्फ़ सम्मी आत्मज नाजिम 21/03/2025 तीनों के उपर कटनी चली गैंगवार हुआ ऐसे अनेकों घटनाएं हैं ,पर जेल प्रशासन उन्हें बालात दबा देता है,जेल से सूचनाएं बाहर नही निकल पाती हैं, गैंगवार ,धर्मांतरण ,यौन शोषण कटनी चलने जैसे अपराध आम घटना है । प्रहरी ,अधिकारी नगद और नशे के सौदागर हैं नगदी में सुविधाएं बैरकों तक पहुँच जाती है,आम कैदी को प्याज टमाटर मय्सर नहीं मुलाक़ात से ही चालू हो जाती है ,वीआईपी चहेते कैदियों को ड्राई फ्रूट मिठाई, सिगरेट,  फल गुटखा गांजा और नशे के हर सामान की उपलब्धता, त्यौहारों के बहाने चहेते कैदियों के किराने सामानो की व्यवस्था खाने से लेकर होटल वाली सारी व्यवस्था, जिन कैदियों के मुलाक़ाती नहीं आते उनका धर्म परिवर्तन हो रहा।

कागज में हिंदू कई जेल अंदर बन गए हैं ईसाई, नगद का खेल हैं अधिकारी से लेकर प्रहरी सब मग्न हैं, मोबाइल ढूढ़ने जेल उप महानिरीक्षक गए थे पर मिलता कैसे जब चक्कर अधिकारी ही सामर्थ्य वानों के लिए मोबाइल लाते ले जाते हैं, अपनी जेबों में, बैरक जगह, बिस्तर ,नहाने खाने ,घूमने की व्यवस्था चढ़ावा में उपलब्ध हैं  । चढ़ावे में मुलाक़ात घंटो की जेलर कक्ष भी उपलब्ध हैं, चक्कर अधिकारी हर असंवैधानिक अपराधिक कृत्यों में लगे हैं, वीआईपीयों आमद के बाद लाखों में घुस ले रहे उपर वाले तक पहुंचा रहे ,मानवाधिकारो का हनन जेल में ही नही हो रहा न्यायालय परिसर से पेशी कक्ष में भेड़ बकरियों की तरह हवालाती ,कैदी ठूसे जाते हैं  । पांच सौ रूपये में दो समोसे बेचे जाते हैं, पैसा फेको तमाशा देखो का खेल है, जेल में चार दिवारी की कैद में सिर्फ कैदी कैद नही है कैद न्याय मानवाधिकार भी हैं, वीआईपी को हर मेडिकल सुविधा अस्पतालों में भ्रमण की सुविधा आम कैदी अदद दवाई की मदद नही पाता ,नियम की धज्जियां उड़ाई जा रही घूसखोरी में मानवाधिकार की रोज चोरी हो रही,कैदी प्रताड़ित हो रहे जेल प्रशासन अपनी जेबे भर रहा ऐसे में इस दंश का ईलाज बंदी अपनी जान देके करा रहा । पीड़ा बंदियो को आत्महंता बना रहा ऐसे माहौल में ना ये पहली आत्महत्या  है ना आखिरी प्रताड़ना बंद  ना होगी तो परिणाम क्या होंगे ?  जेल प्रसासन उपर से नीचे तक घूस की दूकान चला रहा राजनीतिक नेतृत्व को संज्ञान लेना चाहिए बंदियो की जान से खिलवाड़ बंद होना चाहिए।

 


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *