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पीडीएस के 80 हजार बारदाने गायब, जांच करने पहुंची टीम - Somanshu News

पीडीएस के 80 हजार बारदाने गायब, जांच करने पहुंची टीम

पीडीएस के 80 हजार बारदाने गायब, जांच करने पहुंची टीम

रायगढ़ :  धान खरीदी के बीच में मार्कफेड के गोदाम से हजारों नग पीडीएस बारदाने चोरी होने का मामला सामने आया है। जिस ठेकेदार को मार्कफेड ने काम दिया था, उसने समितियों में बारदाने पहुंचाए ही नहीं। बताया जा रहा है कि 80 हजार बारदाने बाहर बेच दिए गए हैं। अब कलेक्टर ने एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। राशन दुकानों में जो चावल सप्लाई होता है, उसके खाली बारदाने मार्कफेड वापस ले लेता है ताकि समितियों में धान खरीदी की जा सके। ये बारदाने एक बार ही उपयोग किए होते हैं। पुराने बारदाने कम होते हैं। राशन दुकानों से पास की समितियों में बारदाने पहुंचाए जाते हैं। इसके अलावा पीडीएस बारदानों को मार्कफेड के संग्रहण केंद्रों में भी एकत्र किया जाता है। वहां से फिर समितियों में बारदाने भेजे जाते हैं जिसकी पावती प्रबंधक देता है।

लेकिन रायगढ़ में पीडीएस बारदानों में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। लैलूंगा क्षेत्र के पीडीएस दुकानों से बारदाने एकत्र करके समिति में पहुंचाने का काम किशन, देव और शिवाकांत तिवारी कर रहे थे। तिवारी के पास घरघोड़ा संग्रहण केंद्र का प्रभार भी है। इनका काम था बारदाने एकत्र करके समितियों में पहुंचाना। लैलूंगा क्षेत्र की पीडीएस दुकानों से इकट्ठा किए गए बारदानों में करीब 80 हजार बारदाने समितियों में नहीं पहुंचे। इन बोरों को बेचे जाने की जानकारी मिल रही है। कलेक्टर ने जांच और एफआईआर के आदेश दिए थे। सोमवार को जांच टीम ने पावती मिलान की जिसमें 80 हजार बारदानों की जानकारी मिली।

कहां बेचे बारदाने

लैलूंगा क्षेत्र में बिना किसी घोटाले के धान खरीदी हो जाए, ऐसा संभव ही नहीं है। मार्कफेड के संग्रहण केंद्र से गायब बारदाने समितियों में या राइस मिलर्स को बेचे गए होंगे। बड़े कोचियों के साथ मिलकर भी साजिश रची गई होगी। प्रारंभिक जांच में बारदानों की कमी पकड़ी जा चुकी है। समितियों में पीडीएस बारदाने कम मिले तो जांच शुरू हुई। कलेक्टर ने इस मामले में एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।

खाद भी हो चुका है चोरी

घरघोड़ा संग्रहण केंद्र में ऐसी पहली गड़बड़ी नहीं है। इसके पूर्व टेंडा नवापारा समिति को भेजा गया 25 एमटी डीएपी और 25.20 एमटी यूरिया भी गायब हो चुका है। लिबरा समिति में भी 30 एमटी डीएपी भी नहीं पहुंचा। कलेक्टर द्वारा गठित कमेटी ने एफआईआर नहीं करवाई बल्कि वसूली के आदेश दिए। खाद की कुल कीमत 15,58,699 रुपए में से पूर्व प्रभारी घरघोड़ा संग्रहण केंद्र वर्तमान सेवानिवृत्त से 10,98,309 रुपए वसूले जाने थे। शिवाकांत उसी का पुत्र बताया जा रहा है जो घरघोड़ा संग्रहण केंद्र का प्रभारी बन बैठा है।

क्या कहते हैं चितरंजन 

बारदाने चोरी होने की जांच की जा रही है। कलेक्टर साहब के निर्देश पर जल्द ही इस मामले में कार्रवाई होगी।

– चितरंजन सिंह, खाद्य अधिकारी


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