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जिला अस्पताल में शर्मनाक करतूत,नशे में धुत परिजनों ने महिला डॉक्टरों और स्टाफ को पीटा, मौत के बाद जमकर हुआ हंगामा - Somanshu News

जिला अस्पताल में शर्मनाक करतूत,नशे में धुत परिजनों ने महिला डॉक्टरों और स्टाफ को पीटा, मौत के बाद जमकर हुआ हंगामा

जिला अस्पताल में शर्मनाक करतूत,नशे में धुत परिजनों ने महिला डॉक्टरों और स्टाफ को पीटा, मौत के बाद जमकर हुआ हंगामा

 गौरेला-पेंड्रा-मरवाही  : छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (जीपीएम) जिले से चिकित्सा जगत को शर्मसार करने वाली एक घटना सामने आई है। यहाँ के जिला अस्पताल में इलाज के दौरान एक मरीज की मौत से गुस्साए और नशे में धुत परिजनों ने डॉक्टरों और अस्पताल कर्मियों के साथ जमकर मारपीट और गाली-गलौज की।

इस हमले में विशेष रूप से ड्यूटी पर तैनात महिला डॉक्टरों को निशाना बनाया गया, जिससे अस्पताल परिसर में दहशत का माहौल बन गया। पुलिस ने इस मामले में सिविल सर्जन की शिकायत पर आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और छत्तीसगढ़ चिकित्सा सेवक सुरक्षा अधिनियम के तहत कड़ा मामला दर्ज किया है।

घटनाक्रम के अनुसार, 26 दिसंबर की रात मरवाही के भर्रीडांड इलाके में एक सड़क दुर्घटना हुई थी, जिसमें घायल तीन मरीजों को जिला अस्पताल गौरेला लाया गया। डॉक्टरों ने प्रारंभिक जांच के बाद एक मरीज, दुर्गेश रजक को मृत घोषित कर दिया, जबकि अन्य दो घायलों—ईश्वर और विवेक—की स्थिति प्राथमिक उपचार के बाद स्थिर बताई।

उन्होंने डॉक्टरों पर इलाज न करने का झूठा आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। परिजनों ने महिला डॉक्टरों के साथ बदतमीजी की और उन पर बेवजह ऑक्सीजन लगाने व वार्ड में भीड़ जमा करने का दबाव बनाने लगे।

हंगामा इतना बढ़ गया कि जब वार्ड बॉय और सुरक्षा गार्डों ने स्थिति को संभालने की कोशिश की, तो आरोपियों ने उन पर भी हमला बोल दिया। इस हिंसक झड़प में कई सुरक्षाकर्मियों और अस्पताल के कर्मचारियों को चोटें आईं।

आरोपियों ने न केवल मारपीट की, बल्कि डॉक्टरों और स्टाफ को अश्लील गालियां देते हुए जान से मारने की धमकी भी दी।

अस्पताल प्रशासन ने तुरंत डायल 112 को सूचना दी, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची। सिविल सर्जन एवं मुख्य अस्पताल अधीक्षक डॉ. देवेंद्र सिंह पैकरा की लिखित शिकायत पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 296, 351(3), 115(2), 3(5) और छत्तीसगढ़ चिकित्सा सेवक तथा चिकित्सा सेवा संस्थान अधिनियम 2010 के तहत प्राथमिकी दर्ज की है।

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ का यह विशेष अधिनियम डॉक्टरों और अस्पताल की संपत्ति के खिलाफ हिंसा को एक संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध बनाता है, जिसमें कठोर सजा का प्रावधान है।

फिलहाल, थाना गौरेला पुलिस ने मामले को विवेचना में ले लिया है और अस्पताल में लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं।

पुलिस ने आश्वासन दिया है कि स्टाफ के बयानों और साक्ष्यों के आधार पर दोषियों के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। दूसरी ओर, जिला अस्पताल प्रबंधन ने इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा है कि इस तरह के हिंसक व्यवहार से चिकित्सा सेवाएं बुरी तरह प्रभावित होती हैं और भविष्य में स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा के लिए और कड़े इंतजाम किए जाएंगे.


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