WordPress database error: [Out of range value for column 'id' at row 1]
INSERT INTO `GUVAl_visitors_stat` (`time`, `ip`) VALUES ('1784766651', '216.73.216.25')

ईडी को लखमा के खिलाफ मिले सबूत: जांच एजेंसी का दावा- लखमा को भी मिलता था हिस्‍सा - Somanshu News

ईडी को लखमा के खिलाफ मिले सबूत: जांच एजेंसी का दावा- लखमा को भी मिलता था हिस्‍सा

ईडी को लखमा के खिलाफ मिले सबूत: जांच एजेंसी का दावा- लखमा को भी मिलता था हिस्‍सा

रायपुर  : पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा और उनके पुत्र हरीश लखमा और उनके करीबी लोगों पर छापे की कार्रवाई को लेकर ईडी का बयान सामने आया है। ईडी ने छापे में लखमा के खिलाफ सबूत मिलने का दावा किया है।

ईडी की तरफ से जारी बयान में बताया गया है क‍ि 28 दिसंबर को छत्तीसगढ़ के रायपुर , धमतरी और सुकमा जिलों में स्थित सात परिसरों में तलाशी अभियान चलाया है। तलाशी अभियान पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा के आवासीय परिसर में किया गया था, जो कथित तौर पर आबकारी मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान नकद में अपराध की आय (पीओसी) के मुख्य प्राप्तकर्ता थे। उनके बेटे हरीश लखमा और उनके करीबी सहयोगियों के आवासीय परिसरों में भी तलाशी ली गई। तलाशी अभियान के परिणामस्वरूप, ईडी घोटाले की प्रासंगिक अवधि के दौरान कवासी लखमा द्वारा नकद में पीओसी के उपयोग से संबंधित सबूत जुटाने में सक्षम रही है। इसके अलावा, तलाशी में कई डिजिटल उपकरणों की बरामदगी और जब्ती भी हुई, जिनमें आपत्तिजनक रिकॉर्ड होने का संदेह है।

ईडी की जांच से पहले पता चला था कि अनवर ढेबर, अनिल टुटेजा और अन्य लोगों का शराब सिंडिकेट छत्तीसगढ़ राज्य में काम कर रहा था। इस घोटाले से उत्पन्न पीओसी का अनुमान लगभग 2161 करोड़ रुपये है। ईडी की जांच से पता चला है कि कवासी लखमा शराब घोटाले से उत्पन्न पीओसी से मासिक आधार पर बड़ी मात्रा में नकद प्राप्त करता था। 2019 से 2022 के बीच चले शराब घोटाले में ईडी की जांच से पता चला है कि पीओसी अवैध कमीशन के रूप में उत्पन्न किया गया था जो कई तरीकों से उत्पन्न किया गया था:

भाग-ए कमीशन: सीएसएमसीएल अर्थात शराब की खरीद और बिक्री के लिए राज्य निकाय द्वारा डिस्टिलर्स से उनसे खरीदी गई शराब के प्रति ‘केस’ पर रिश्वत वसूल की गई।

भाग-बी कच्ची शराब बिक्री: बेहिसाब “कच्ची ऑफ-द-बुक” देशी शराब की बिक्री। इसमें इस मामले में एक भी रुपया सरकारी खजाने में नहीं पहुंचा और बिक्री की सारी रकम सिंडिकेट ने हड़प ली। अवैध शराब की बिक्री सरकारी दुकानों से ही की जाती थी।

भाग-सी कमीशन: शराब बनाने वालों से रिश्वत ली जाती है ताकि उन्हें कार्टेल बनाने और बाजार में निश्चित हिस्सेदारी की अनुमति मिल सके।

एफएल-10ए लाइसेंस धारकों से कमीशन, जिन्हें विदेशी शराब क्षेत्र में भी कमाई के लिए पेश किया गया था।

इस मामले में, 205 करोड़ रुपये (लगभग) की संपत्ति कुर्क करने का एक आदेश पहले ही जारी किया जा चुका है। अब तक इस मामले में पाँच लोगों को गिरफ़्तार किया गया है और अभियोजन शिकायत के साथ-साथ दो पूरक पीसी दायर किए गए हैं, जिस पर माननीय विशेष न्यायालय (पीएमएलए), रायपुर द्वारा पहले ही संज्ञान लिया जा चुका है।


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *