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एक बार लगाओ, 30 साल तक कमाओ, किसान ने 5 एकड़ में की इस फल की खेती - Somanshu News

एक बार लगाओ, 30 साल तक कमाओ, किसान ने 5 एकड़ में की इस फल की खेती

एक बार लगाओ, 30 साल तक कमाओ, किसान ने 5 एकड़ में की इस फल की खेती

बागवानी एक ऐसा काम बन गया है जिससे किसान साल का दस लाख से भी अधिक सिर्फ मुनाफा कमा रहे हैं. एक ऐसे ही किसान भोजपुर के आयर गांव के उपेंद्र सिंह हैं. इन्हें बागवानी का ऐसा शौक चढ़ा कि एक-दो नहीं बल्कि 16 किस्मों के अमरूद की बागवानी कर रहे हैं. भोजपुर के ये पहले किसान हैं और सम्भवतः बिहार के भी, जो एक साथ इतनी वैरायटी का अमरूद लगा रहे हैं.

उपेंद्र सिंह ने 5 एकड़ में सात सौ अमरूद के पेड़ लगाए हैं. खास बात है कि इन्होंने इसके पौधे इजरायल से लेकर देश के अलग-अलग कृषि विश्वविद्यालय और प्रमुख नर्सरियों से मंगवाए हैं.
एक बार लगाओ, सालों कमाओ
किसान परंपरागत फसलों के साथ फलों की खेती करके भी बेहतर लाभ कमा सकते हैं. इन्हीं में से एक है अमरूद. अमरूद की खेती करके किसान बहुत अच्छा लाभ कमा सकते हैं. अमरूद की खेती की खासियत यह है कि इसकी खेती साल में दो बार की जा सकती है. इस तरह एक बार अच्छी किस्म का चुनाव करके इससे 30 साल तक मुनाफा कमाया जा सकता है.

इसके एक पेड़ से करीब 40 से 45 किलो फल प्राप्त किए जा सकते हैं. अमरूद का बाजार भाव भी अच्छा मिल जाता है. ऐसे में अमरूद की खेती किसानों के लिए लाभ का सौदा साबित हो सकती है.
ये हैं बेहतरीन किस्में
आज हम आपको अमरूद की खेती के लिए बेहतर पैदावार देने वाली टॉप 10 किस्मों की जानकारी दे रहे हैं. इसके अलावा अमरूद की खेती पर सरकार की ओर से मिलने वाली सब्सिडी की जानकारी भी दी जा रही है.

किसान उपेंद्र सिंह के द्वारा जो विशेष किस्मों की बागवानी की गई है, उनमें यह शामिल हैं—
श्वेता – श्वेता किस्म को सीआईएसएच लखनऊ ने विकसित किया है. इस किस्म के पेड़ की ऊंचाई कम होती है. 6 साल पुराने पेड़ से 90 किलो तक अमरूद तोड़े जा सकते हैं. एक फल का वजन लगभग 225 ग्राम तक होता है और फल कई दिनों तक खराब नहीं होता.
लखनऊ 49 – यह किस्म साइज में छोटे पेड़ों पर उगती है, लेकिन फल बेहद मीठा और स्वादिष्ट होता है. एक पेड़ से 130 से 155 किलो तक उत्पादन मिल सकता है. यह किसानों में लोकप्रिय किस्म है.
थाई अमरूद – यह विदेशी किस्म है. इसके पौधों पर जल्दी फल आ जाते हैं. थाई अमरूद की कीमत भी अधिक मिलती है और यह जल्दी खराब नहीं होता. इसे 12 से 13 दिन तक भंडारित किया जा सकता है. एक पेड़ से 4 से 5 साल में 100 किलो तक उत्पादन शुरू हो जाता है.
इसके अलावा उपेंद्र सिंह ने धवल, ताइवान पिंक, ताइवान सफेद, रेड डायमंड, जापान, थाईलैंड की विलास, हरियाणा 49, इलाहाबाद सुर्खा, इलाहाबाद मृदुला, अर्का मृदुला, सीडलेस, रेड फ्लैश, पंजाब पिंक और पंत प्रभात जैसी किस्मों की बागवानी भी की है.
बारिश में नहीं तोड़ते फल
उपेंद्र सिंह ने बताया कि कोरोना काल के दौरान उनके मन में ऑर्गेनिक फल उत्पादन का विचार आया. इसके बाद 25 एकड़ में केवल बागवानी शुरू की, जिसमें 5 एकड़ में अमरूद लगाए. पौधे उन्होंने इज़रायल और देश के चुनिंदा कृषि विश्वविद्यालयों व नर्सरियों से मंगवाए. वह साल में दो सीजन में फल लेते हैं, लेकिन बारिश के सीजन का फल नहीं तोड़ते, क्योंकि वह जल्दी सड़ जाता है और उसमें कीड़े लग जाते हैं.

जैविक खाद से खास बनता अमरूद
पहले अमरूद लोकल मार्केट में बेचे जाते हैं और बाद में बड़े कारोबारी संपर्क करते हैं तो उन्हें भी सप्लाई दी जाती है. उपेंद्र सिंह का कहना है कि देश के कई राज्यों में उनका व्यापार है, लेकिन जो सुकून उन्हें बागवानी से मिलता है, वह कहीं और नहीं मिलता. उनकी बागवानी में केवल जैविक खाद का उपयोग होता है, जिसे वे खुद तैयार करते हैं. इसी वजह से उनके अमरूद का स्वाद और भी खास होता है.

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