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यूरिया- नाइट्रोजन का चक्कर छोड़िए... रोपाई के टाइम करें ये जुगाड़, लहलहाएगी धान की फसल - Somanshu News

यूरिया- नाइट्रोजन का चक्कर छोड़िए… रोपाई के टाइम करें ये जुगाड़, लहलहाएगी धान की फसल

यूरिया- नाइट्रोजन का चक्कर छोड़िए… रोपाई के टाइम करें ये जुगाड़, लहलहाएगी धान की फसल

शाहजहांपुर : शाहजहांपुर में किसान यूरिया खाद की किल्लत की वजह से परेशान हैं. समय पर खाद न मिलने की वजह से किसानों की धान की फसल को भारी नुकसान हो रहा है. किसानों का कहना है कि अगर समय पर धान की फसल में यूरिया यानी नाइट्रोजन की आपूर्ति नहीं की गई तो उत्पादन में गिरावट आएगी. वहीं कृषि एक्सपर्ट का कहना है कि अगर किसानों को यूरिया खाद उपलब्ध नहीं हो पा रही है तो वह वातावरण में मौजूद नाइट्रोजन का इस्तेमाल धान की फसल के लिए कर सकते हैं. इसके लिए किसानों को एक खास तरह के शैवाल का इस्तेमाल धान की फसल में करना होगा.
कृषि विज्ञान केंद्र नियामतपुर में तैनात कृषि एक्सपर्ट डॉ एनपी गुप्ता ने बताया कि आमतौर पर धान की फसल से बेहतर उत्पादन लेने के लिए 120 से 125 किलोग्राम नाइट्रोजन की आवश्यकता होती है. इसके लिए किसान रासायनिक उर्वरक यूरिया का इस्तेमाल करते हैं. वातावरण में भी करीब 78% तक नाइट्रोजन मौजूद होता है लेकिन वातावरण में मौजूद नाइट्रोजन का इस्तेमाल पौधे नहीं कर पाते. इसी वजह से किसानों को अलग से नाइट्रोजन पर पैसा खर्च करना पड़ता है. वातावरण में मौजूद नाइट्रोजन का इस्तेमाल धान के पौधों के लिए करना चाहते हैं तो किसान नील हरित शैवाल का इस्तेमाल कर सकते हैं. यह वायुमंडल में मौजूद नाइट्रोजन को पौधों को ग्रहण करने के लिए तैयार करता है. इसके बाद किसानों को अलग से यूरिया का छिड़काव करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगा.
कैसे करें नील हरित शैवाल का उपयोग?
नील हरित शैवाल हवा में मौजूद नाइट्रोजन को खींचकर पौधों तक पहुंचाता है. इससे पौधों को समय पर नाइट्रोजन मिलती रहती है. धान की रोपाई के 7 से 10 दिन बाद, एक एकड़ खेत में 5 किलोग्राम नील हरित शैवाल को बिखेर दें. इसके बाद खेत में नमी बनाए रखें. खेत को सूखने न दें. ऐसा करने से किसानों को अलग से नाइट्रोजन डालने की जरूरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि पौधे धीरे-धीरे वायुमंडल से नाइट्रोजन लेते रहेंगे. यह तकनीक किसानों के लिए न केवल किफायती साबित हो सकती है, बल्कि मिट्टी की सेहत के लिए भी बेहतर है. किसानों की लागत भी कम हो जाएगी.

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