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कोटेतरा में नागपंचमी पर नगमत का आयोजन, एक एक कर सभी को दूध और लाई का कराया भोग - Somanshu News

कोटेतरा में नागपंचमी पर नगमत का आयोजन, एक एक कर सभी को दूध और लाई का कराया भोग

कोटेतरा में नागपंचमी पर नगमत का आयोजन, एक एक कर सभी को दूध और लाई का कराया भोग

ग्रामीणों में उत्साह का माहौल

जैजैपुर : सक्ती जिले के ग्राम पंचायत कोटेतरा में नागपंचमी के दिन जहां नागपंचमी त्यौहार को विशेष तरह से मनाया जाता है. दिन भर पूजा अर्चना के बाद कोटेतरा के गुड़ी चौक में नगमत का आयोजन किया गया . जिसमें लोग बैगा के मंत्रों पर सांपों की तरह जमीन पर लोटते दिखाई देते हैं.इस त्यौहार को मानने की हर जगह पर अलग अलग रीति रिवाज है. कोटेतरा में भी नागपंचमी को खास तरह से मनाया गया जिसमें गांव के बैगा और उनकी टीम गाजा बाजा के साथ अपने मंत्र को दोहराये और सांप की तरह लोटते हुए आदमी को मंत्र से नियंत्रण किया गया. इसे देखने के लिए पूरे गांव की बहु बेटी माता बहने आदि लोगों की भारी भीड़ उमड़ी थी
नागपंचमी के दिन नगमत पूजा की परंपरा वर्षों से चली आ रही है. इस परंपरा को आज भी गांव के लोग मना रहे हैं. शाम 3 बजे गांव के गुड़ी चौक पर बैगा छौरा यादव ने बेल के पीढ़ा में गुरु गद्दी की स्थापना कर पूजा शुरू की और उनके शिष्यों ने भी नारियल अगरबत्ती जला कर पूजा की. जिसके बाद बैगा ने मंत्र पढ़ कर नगमत की शुरुआत की. जिसके बाद लोग मंत्र सुन कर एक के बाद एक नाग की तरह जमीन में लोटने लगे और हरकतें भी सांप की तरह करने लगे. सर्प बने ग्रामीणों के साथ परिक्रमा करने के बाद बैगा ने एक एक कर सभी को दूध और लाई का भोग कराया.

नागदेव के पूजा की है मान्यता

इस मौके पर न केवल पूरा गांव, बल्कि आसपास के लोग नगमत देखने पहुंचे हुए थे इस दिन खेतों में कृषि कार्य बंद रहता था अच्छी फसल की कामना के लिए किए जाने वाली इस पूजा के पीछे सर्पदंश से जुड़ी किवदंती भी है कि इस गांव में आज तक कभी सर्प दंश से किसी ग्रामीण की मौत नहीं हुई.ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी लोग सर्प दंश में बैगा पर विशेष रूप से विश्वास करते है. जिला अस्पताल के सिविल सर्जन ने पुरानी परंपरा और ग्रामीणों की आस्था पर कुछ कहा तो नहीं, लेकिन कहा कि “इस तरह के आयोजन को सिर्फ मनोरंजन के रूप में ही लेने चाहिए और अगर किसी को सांप काटे, तो बैगा गुनिया के पास जाने के बजाय अस्पताल में डॉक्टरी उपचार की ही सबसे अच्छा उपाय है.”


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