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मोतियों जैसे टमाटर की खेती, देखें रंग-बिरंगे टमाटरों की अनदेखी तस्वीरें, जो किसानों को बना रहे हैं मालामाल - Somanshu News

मोतियों जैसे टमाटर की खेती, देखें रंग-बिरंगे टमाटरों की अनदेखी तस्वीरें, जो किसानों को बना रहे हैं मालामाल

मोतियों जैसे टमाटर की खेती, देखें रंग-बिरंगे टमाटरों की अनदेखी तस्वीरें, जो किसानों को बना रहे हैं मालामाल

कम लागत में ज्यादा मुनाफा कमाने की चाह रखने वाले किसानों के लिए टमाटर की एक खास प्रजाति सुनहरा अवसर लेकर आई है. बलिया जिले के कृषि वैज्ञानिकों ने मोतियों जैसे दिखने वाले रंग-बिरंगे टमाटरों की ऐसी किस्म बताई है, जो सिर्फ स्वाद और पौष्टिकता में ही नहीं बल्कि बाजार मांग में भी अव्वल है. चेरी टमाटर, पूसा चेरी, रेड चेरी जैसे नामों से मशहूर ये टमाटर 15 दिनों तक खराब नहीं होते और एक ही पौधे से सैकड़ों की संख्या में अंगूर जैसे गुच्छों में फल निकलते हैं, जिससे किसान कम मेहनत में मालामाल बन सकते हैं.

आज के समय में कम लागत में बंपर लाभ कमाना चाहता, जिससे वह मलामाल बन सके, लेकिन उसे उसकी इच्छा के अनुसार लाभ शायद ही मिल पाता हो, ऐसे में जनपद के एक प्रोफेसर ने दावा है कि मोतियों जैसे आधुनिक रंग बिरंगे टमाटर की खेती यदि किसान करें तो लागत से कही ज्यादा मुनाफा कमाया जा सकता है.
मोतियों के आकार का यह टमाटर लाल, पीले और हरे रंग में के भी होते हैं. ये वही टमाटर की प्रजाति है, जिसका सलाद बड़े होटलों के डाईनिंग टेबूल की रौनक में चार चांद लगाता है. इसका स्वाद भी लाजवाब होता है. साथ ही यह टमाटर पौष्टिकता और विटमिन से भी भरपूर होता है.
आमतौर पर टमाटर की खेती खेतों की मेड़ पर छोटे छोटे पौधों के माध्यम से की जाती है, लेकिन इस टमाटर की खेती किचन गार्डेन, पाली हाउस या छतों पर रस्सी के सहारे इसकी लताएं फैलती है और किसानों को ज्यादा मेहनत भी नही करनी पड़ती है. एक लता मे पांच सौ से एक हजार फल अंगूर के गुच्छों की तरह उत्पादित होते हैं. यह टमाटर लगभग 15 दिनों तक खराब नहीं होता है.
टाउन महाविद्यालय बलिया के अनुवांशिकी एवं पादप प्रजनन के विशेषज्ञ प्रो. बृजेश सिंह ने बताया कि टमाटर की इस अनोखी प्रजाति का कोई जवाब नही है. इसे देखकर आसानी से अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता है कि यह टमाटर है. लेकिन खाने के बाद अक्सर लोगों के मुंह से निकल जाता है कि अरे! यह तो टमाटर है.
लोगों को अपनी ओर आकर्षित वाला यह टमाटर किसानों को मालामाल बना सकता है. इसकी नर्सरी लगभग 25 दिन में तैयार हो जाती है. उसके बाद निश्चित दूरी पर इसको लगा दिया जाता है और धीरे-धीरे रस्सी या बांस के सहारे इसको ऊपर चढ़ाया जाता है. लगभग 60 दिनों में यह फल देने लगता है.
इसकी कई अनोखी प्रजाति है जैसे – चेरी टमाटर, पूसा चेरी टमाटर, रेड चेरी, स्वीट चेल्सी, स्वीट 100, स्वीट मिलियन, कैम्पारी, पीला नाशपाती और अंगूर लता आदि.
यदि आपके पास पॉली हाउस या नेट हाउस है, तो इसकी खेती एक सालों साल की जा सकती है. ध्यान रहे कि इस विशेष प्रजाति के टमाटर के फल मिट्टी के सम्पर्क न आने पाए अन्यथा फल में सड़ने की सम्भावना अधिक हो जाती है. इसमें रोग व्याधि की संभावना कम होती है. अगर बीच में कोई दिक्कत आए तो एक्सपर्ट से सलाह ले सकते हैं

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