सहायक परियोजना अधिकारी मयंक शुक्ला और लेखापाल ऋचा अग्रवाल जांच को प्रभावित करने षड्यंत्रों में लगे, लगातार ले रहे जांच प्रक्रिया की गोपनीय तथ्यों की जानकारी
- लाईवलीहुड कॉलेज में बिना उपस्थिति के ही जालसाजी कर उपस्थिति दिखाने की प्रमाण सहित शिकायत जांच पर आंच या निष्पक्ष जांच,आर्थिक भ्रष्टाचार का नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य के साथ भी खिलवाड़
- सहायक संचालक डी.डी. महंत के नेतृत्व में तीन सदस्यों की टीम कर रही जांच, लाईवलीहुड कॉलेज जांजगीर का छात्रों के फिंगरप्रिंट क्लोन बनाकर उपस्थिति दर्ज करने का मामला
जांजगीर : जिला परियोजना लाईवलीहुड कॉलेज जांजगीर में पीएम और सीएम कौशल विकास योजनाओं के अंतर्गत संचालित प्रशिक्षणों में फर्जीवाड़े की शिकायत पर प्रशासन ने आखिरकार कार्रवाई की है। इस मामले में कलेक्टर कार्यालय के पत्र पर जिला पंचायत सीईओ ने एक जांच समिति गठित की है, जिसमें सहायक संचालक दिग्विजय दास महंत, ईडीएम सुनील साहू सहित तीन लोगों को शामिल किया गया है। यह टीम मामले की जांच कर रही है। सम्बन्धितों का बयान लिया जा चुका है।सबसे पहले आरोपी ऋचा अग्रवाल द्वारा प्रशिक्षकों को अपने पक्ष में बयान देने के लिए दबाव और प्रलोभन देने की बात सामने आई थी।ज्ञात हो कि ऋचा अग्रवाल की कार्यशैली हमेशा विवादयुक्त रहा है। उस पर हमेशा से भ्रष्टाचार और लोगों को तंग करने का आरोप लगता रहा है। उसकी शिकायतें राज्य स्तर पर अनेक बार की जा चुकी है।किंतु मयंक शुक्ल के संरक्षण के कारण वह अपने कारनामो को अंजाम देती रही है।

फिंगरप्रिंट क्लोनिंग का मामला तब सामने आया जब शिकायतकर्ता प्रशांत राठौर ने प्रशिक्षण में हो रहे घपले का स्टिंग वीडियो बनाकर कलेक्टर से लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय तक शिकायत की। राठौर ने आरोप लगाया कि प्रशिक्षणों में नाम मात्र की उपस्थिति दिखाई जा रही है, जबकि हकीकत में कई बैचों में छात्र आते ही नहीं। सबसे गंभीर आरोप यह है कि छात्रों के फिंगरप्रिंट के क्लोन बनाकर बायोमेट्रिक मशीन से उनकी फर्जी उपस्थिति दर्ज की जा रही है।
फिलहाल कॉलेज में इलेक्ट्रीकल, फिटर, ड्राइविंग और सेल्फ इम्प्लायड टेलर जैसे चार प्रशिक्षण चल रहे हैं। इनमें से इलेक्ट्रीकल और फिटर की जिम्मेदारी लाईवलीहुड कॉलेज के पास है, जबकि बाकी दो ट्रेनिंग पार्टनरों द्वारा संचालित हैं। खास बात यह है कि कॉलेज में 14 से 15 सीसीटीवी कैमरे और बायोमेट्रिक सिस्टम लगे होने के बावजूद यह फर्जीवाड़ा खुलेआम किया जा रहा है।
आरोप है कि सहायक परियोजना अधिकारी मयंक शुक्ला और लेखापाल ऋचा अग्रवाल के संरक्षण में ट्रेनरों ने फर्जीवाड़ा को अंजाम दिया है।यह मामला सिर्फ आर्थिक भ्रष्टाचार का नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ है। शासन की महत्वाकांक्षी योजना को भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ते देख अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच समिति कितनी निष्पक्षता और गंभीरता से अपनी जिम्मेदारी निभाती है या फिर पूर्व जांच की तरह मामले को ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश होती है। इधर, शिकायतकर्ता प्रशांत राठौर ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है, और निष्पक्ष जांच नहीं होने पर न्यायालय जाने की बात कही है। ज्ञात हो कि सहायक परियोजना अधिकारी मयंक शुक्ला पर सालों से वी टी पी से पैसा लेकर काम करने का आरोप लगता रहा है। कार्यालय से लगातार अनुपस्थित रहने ,चहेते लोगों को कार्यालय में रखने तथा प्रशिक्षण कार्यक्रमों में निरीक्षण सम्वन्धी अपने दायित्वों को नही निभाने के आरोप उन पर हैं। सालों से लगातार शिकायत पर शिकायत की जा रही है लेकिन तक किसी अधिकारी ने निष्पक्ष जांच नही किया है जिसके कारण ऐसे अधिकारी कर्मचारी कुम्भ कर्ण की तरह जमे हुए है और इनका मनोबल बढ़ा हुआ है क्योंकि चोर चोर मसोरे भाई की तरह शासन प्रशासन अपना कार्य कर रही है जिसके कारण यह दोनों आरोपी अधिकारी कर्मचारियों को कोई फर्क नही पड़ रहा है लेकिन भगवान के घर देर है अंधेर नही ।
