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छत्तीसगढ़ में 150 घाट जबकि 400 खदानों से निकल रही रेत, सीएम की रडार पर कलेक्टर - Somanshu News

छत्तीसगढ़ में 150 घाट जबकि 400 खदानों से निकल रही रेत, सीएम की रडार पर कलेक्टर

छत्तीसगढ़ में 150 घाट जबकि 400 खदानों से निकल रही रेत, सीएम की रडार पर कलेक्टर

रायपुर :छत्तीसगढ़ में रेत के अवैध उत्खनन का काम बेरोकटोक रहा है। खनिज माफिया बेखौफ होकर खुलेआम छत्तीसगढ़ की जीवनदायिनी नदियों को खोखला कर रहा है। हाल ही बलरामपुर में आरक्षक की हत्या और बालोद में पत्रकार पर जानलेवा हमले की वारदातों ने इस मुद्दे को फिर गरम कर दिया है। द सूत्र ने अवैध उत्खनन के खेल की पड़ताल की तो हैरान करने वाली जानकारी सामने आई।

प्रदेश में 400 घाटों से रेत निकाली जा रही है। छत्तीसगढ़ में 150 घाट ऐसे हैं जिनकी रॉयल्टी कटती है यानी ये वैध खदानें हैं। जबकि 250 घाटों की खदानों से रेत का अवैध उत्खनन हो रहा है। सूत्रों की मानें तो रेत माफिया पर राजनीतिक संरक्षण है। सरकार ने जानलेवा बने इस अवैध उत्खनन को रोकने लिए कलेक्टरों की जवाबदेही तय कर दी है।

छत्तीसगढ़ में रेत का अवैध उत्खनन धड़ल्ले चल रहा है। रेत माफिया इतना बेखौफ है कि वो किसी की जान लेने में भी गुरेज नहीं कर रहा। छत्तीसगढ़ में हालत यह है कि यहां 410 रेत घाट हैं जिनमें से 150 तो वैध हैं जिनकी रॉयल्टी पर्ची जारी की जाती है बाकी 260 घाटों पर अवैध उत्खनन चल है। अवैध रेत घाटों को राजनीतिक संरक्षण है। हर रेत घाट से रोजाना 35-40 गाड़ी का उत्खनन हो रहा है।

रेत माफिया सीधे बाजार रेत बेच रहा है जिससे सरकार को राजस्व की हानि हो रही है। बीजेपी की सरकार बनने के डेढ़ साल बाद भी गौण खनिज को लेकर कोई नई नीति नहीं आई है। जिसके चलते पुरानी नीति पर ही रेत घाटों का संचालन हो रहा है। जिन रेत घाटों की नीलामी नहीं की गई वे सभी अवैध तरीके से संचालित रहे हैं। इन घाटों पर धड़ल्ले उत्खनन हो रहा है और परिवहन भी जारी है। सूत्रों की मानें तो अवैध उत्खनन करने वालों पर राजनीतिक आकाओं का हाथ है इसलिए जिला प्रशासन भी कार्यवाही करने में लाचार नजर आता है।

अवैध घाटों से महीने में 30 लाख की वसूली 

सूत्रों की मानें तो अवैध रेत घाटों से महीने में 25-30 लाख रुपए की वसूली हो रही है। जिसके चलते अवैध रेत घाटों पर कार्रवाई नहीं होती है। रेत घाटों रेत माफिया के लोगों का कब्जा है। यहां आए दिन खूनी संघर्ष की स्थिति बनती रहती है। पिछले कुछ दिनों में हिंसक घटनाएं रेत घाटों पर हुई हैं।

आरक्षक पर चढ़ाया ट्रेक्टर : बलरामपुर जिले में रेत माफिया ने एक आरक्षक पर ट्रैक्टर चढ़ा दिया जिससे उसकी मौत हो गई। ग्राम लिबरा में कनहर नदी से अवैध रेत खनन किया जा रहा था। 11 मई की रात पुलिस टीम कार्रवाई के लिए पहुंची थी तभी चालक ट्रैक्टर लेकर भागने लगे। मामला सनावल थाना क्षेत्र का है। इस दौरान सनावल थाने के आरक्षक शिव बचन सिंह ने गाड़ी को रोकने की कोशिश की। ट्रैक्टर चालक ने गाड़ी नहीं रोकी और आरक्षक को कुचलते हुए आगे बढ़ गया। हादसे में आरक्षक के सीने में अंदरूनी चोटें आई थीं, गंभीर रूप से घायल आरक्षक ने हॉस्पिटल लाने के दौरान रास्ते में ही दम तोड़ दिया।

पत्रकार पर जानलेवा हमला : बालोद जिले में रेत भंडारण की खबर कवरेज करने गए एक मीडियाकर्मी पर तस्करों ने जानलेवा हमला कर दिया। ग्राम मरकाटोला में पहले तो कृष्णा गंजीर को उन्होंने को लोहे की रॉड से पीटा फिर उस पर हाईवा चढ़ाने की कोशिश की गई। मामला पुरुर थाना क्षेत्र का है। जहां नदियों से अवैध रूप से रेत लाकर भंडारण करने की शिकायत गुरुर तहसील में हुई थी। शिकायत के आधार पर 13 मई की शाम पटवारी डोमेंद्र मंडावी जांच के लिए मौके पर पहुंचे थे।

इस दौरान कवरेज के लिए मीडियाकर्मी भी पहुंचे। जिन्हें देखने के बाद रेत सप्लायर और उनके गुर्गे नाराज होकर मारपीट पर उतर आए। इस दौरान हालात बिगड़ते देख पटवारी सहित सभी लोग जान बचाकर भागे। कृष्णा गंजीर को गंभीर हालात में धमतरी के एक निजी अस्पताल में भर्ती किया गया है।

सरकार की रडार पर कलेक्टर 

इन घटनाओं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नाराजगी जताई है। सीएम की रडार पर कलेक्टर आ गए हैं। सूत्रों की मानें तो अवैध उत्खनन पर सरकार सीधे तौर पर कलेक्टरों की जिम्मेदारी तय कर रही है। सरकार ने सफ कर दिया है कि अवैध उत्खनन पर जिला प्रशासन और खनिज अधिकारियों की गोपनीय चरित्रावली में रेत प्रबंधन से संबंधित निर्देशों के पालन को एक महत्वपूर्ण मूल्यांकन बिंदु के रूप में शामिल किया जाएगा। कलेक्टरों को रेत के अवैध परिवहन और अवैध उत्खनन रोकने के लिए सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। इस कार्रवाई के लिए कलेक्टरों को फ्री हैंड दिया गया है।

रेत के अवैध खनन व परिवहन को रोकने के लिए जिला स्तर पर गठित टास्क फोर्स के माध्यम से निरंतर निगरानी एवं कठोर कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं। तीन माह में अधिकाधिक रेत खदानों को चिन्हांकित कर ई-नीलामी के माध्यम से आबंटन हेतु निविदा जारी की जाएगी। बड़ी मात्रा में रेत की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए पाँच हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल वाली खदानों को प्राथमिकता के आधार पर स्वीकृत करने के निर्देश भी दिए गए।


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