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प्रदोष व्रत की पूजा में करें इस स्तोत्र का पाठ, जल्द मिलेगा लाभ - Somanshu News

प्रदोष व्रत की पूजा में करें इस स्तोत्र का पाठ, जल्द मिलेगा लाभ

प्रदोष व्रत की पूजा में करें इस स्तोत्र का पाठ, जल्द मिलेगा लाभ

हर महीने में दो बार प्रदोष व्रत किया जाता है, एक बार कृष्ण की त्रयोदशी तिथि पर और दूसरी बार शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर। इस दिन पर खासतौर से भगवान शिव जी की पूजा-अर्चना प्रदोष काल में की जाती है।प्रदोष व्रत के दिन विधि-विधान से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करने से साधक के सभी दुख-दर्द दूर हो सकते हैं। इस दिन के पूजन के दौरान आप भगवान शिव को समर्पित श्री शिव रूद्राष्टकम का पाठ कर सकते हैं। ऐसा करने से आपको भगवान शिव का आशीर्वाद मिलता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

श्री शिव रूद्राष्टकम

नमामीशमीशान निर्वाण रूपं, विभुं व्यापकं ब्रह्म वेदः स्वरूपम् ।
निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं, चिदाकाश माकाशवासं भजेऽहम् ॥निराकार मोंकार मूलं तुरीयं, गिराज्ञान गोतीतमीशं गिरीशम् ।

करालं महाकाल कालं कृपालुं, गुणागार संसार पारं नतोऽहम् ॥

तुषाराद्रि संकाश गौरं गभीरं, मनोभूत कोटि प्रभा श्री शरीरम् ।

स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारू गंगा, लसद्भाल बालेन्दु कण्ठे भुजंगा॥

चलत्कुण्डलं शुभ्र नेत्रं विशालं, प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम् ।

मृगाधीश चर्माम्बरं मुण्डमालं, प्रिय शंकरं सर्वनाथं भजामि ॥

प्रदोष व्रत की पूजा प्रदोष काल में करना शुभ माना गया है। माना जाता है कि यदि आप इस दिन पर पूजा के दौरान श्री शिव रूद्राष्टकम का पाठ करते हैं, तो इससे आपको त्वरित लाभ मिल सकते हैं।

प्रचण्डं प्रकष्टं प्रगल्भं परेशं, अखण्डं अजं भानु कोटि प्रकाशम् ।

त्रयशूल निर्मूलनं शूल पाणिं, भजेऽहं भवानीपतिं भाव गम्यम् ॥

कलातीत कल्याण कल्पान्तकारी, सदा सच्चिनान्द दाता पुरारी।

चिदानन्द सन्दोह मोहापहारी, प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी ॥


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