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छत्तीसगढ़ में बुलडोजर कार्रवाई पर रोक, हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से मांगा जवाब - Somanshu News

छत्तीसगढ़ में बुलडोजर कार्रवाई पर रोक, हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से मांगा जवाब

छत्तीसगढ़ में बुलडोजर कार्रवाई पर रोक, हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से मांगा जवाब

बिलासपुर :  8 महीने पहले हिंदी फिल्म दृश्यम के अंदाज में अंबिकापुर के सीतापुर में हुई आदिवासी युवक संदीप लकड़ा की हत्या कर उसके को शव दफना कर उसके ऊपर पानी टंकी का निर्माण कर दिया गया था. बीते दिनों इस मामले में पुलिस ने सीतापुर निवासी ठेकेदार अभिषेक पांडेय को गिरफ्तार किया है. अब आरोपियों के घर तोड़ने की कार्रवाई पर हाईकोर्ट ने तत्काल सुनवाई करते हुए तोड़फोड़ पर रोक लगा दी है. कोर्ट ने शासन से जवाब तलब भी किया है.

बता दें कि सीतापुर निवासी ठेकेदार अभिषेक पांडेय के पास संदीप लकड़ा राजमिस्त्री का काम करता था. ठेकेदार अभिषेक पांडेय, मुंशी प्रत्युष पांडेय और उसके साथ राजमिस्त्री संदीप को उठाकर अपने साथ ले गए थे. जिसके बाद पिटाई कर उसकी हत्या कर दी थी. हत्या के बाद आरोपी शव को मैनपाट ले गए यहां शव दफना दिया और उसके ऊपर पानी टंकी निर्माण का करा दिया.

आरोपी उसके मोबाइल को लेकर मुंबई, गोवा और अन्य जगह घूम कर पुलिस को गुमराह करते रहे. वहीं 16 जून को संदीप की पत्नी ने थाने में उसका अपहरण कर हत्या करने की आशंका व्यक्त करते हुए रिपोर्ट लिखाई थी. तीन माह तक कोई कार्रवाई नहीं होने पर आदिवासी समाज ने धरना प्रदर्शन कर दबाव बनाया. इसके बाद पुलिस हरकत में आई और कड़ाई से पूछताछ करने पर आरोपियों ने हत्या कर शव दफनाने की बात स्वीकार की. उनकी निशानदेही पर पुलिस ने पानी टंकी के नीचे से शव बरामद किया.

मामले में पूर्व विधायक सीतापुर द्बारा बुलडोज़र कार्रवाई की मांग की जा रही थी. इसके जवाब में वर्तमान विधायक द्बारा आरोपी के घर पर बुलडोजर चलवा कर उसे ध्वस्त करने का सार्वजनिक बयान भी दिया गया.

सीतापुर में हुई हत्या के मुख्य आरोपी के घर को तोड़ने के लिए शासन ने कार्रवाई प्रारंभ की थी. इस कड़ी में 11 सितंबर 2024 को सीएमओ नगर पंचायत सीतापुर द्बारा नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर भवन निर्माण अनुज्ञा प्रस्तुत करने या क़ब्ज़ा हटा लेने का नोटिस आरोपी अभिषेक पांडेय के घर पर चस्पा किया गया था. जिसे हाईकोर्ट में तत्काल सुनवाई के अनुरोध के साथ चुनौती दी गई. इस मामले में याचिकाकर्ता द्बारा यह तर्क दिया गया कि निर्माण अनुज्ञा जारीकर्ता अधिकारी ने नोटिस जारी किया हैं जबकि इन्होने ही भवन निर्माण की अनुमति दी है. जानबूझकर सिर्फ तीन दिन का समय दिया गया है.

मामले की तत्काल सुनवाई जस्टिस पार्थ प्रतिम साहू की सिगल बेंच में हुई. कोर्ट ने इस नोटिस को 15 दिन के लिए स्थगित कर दिया और याचिकाकर्ता को अनुज्ञप्ति की प्रति और नोटिस का जवाब सीएमओ नगर पंचायत सीतापुर के समक्ष पेश करने के लिए कहा है.


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