WordPress database error: [Out of range value for column 'id' at row 1]
INSERT INTO `GUVAl_visitors_stat` (`time`, `ip`) VALUES ('1781160594', '198.244.226.133')

पाकिस्तान के जैसा होगा हाल, चीन के कर्ज में फंस रहा बांग्लादेश; श्रीलंका भी झेल चुका मुसीबत - Somanshu News

पाकिस्तान के जैसा होगा हाल, चीन के कर्ज में फंस रहा बांग्लादेश; श्रीलंका भी झेल चुका मुसीबत

पाकिस्तान के जैसा होगा हाल, चीन के कर्ज में फंस रहा बांग्लादेश; श्रीलंका भी झेल चुका मुसीबत

नई दिल्ली :  चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआइ) पर ढाका की बढ़ती निर्भरता को देखते हुए इसमें कोई हैरानी की बात नहीं है कि बांग्लादेश भी उसी तरह कर्ज के जाल में फंस गया है, जैसे श्रीलंका फंसा था। एशियन न्यूज पोस्ट की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि ढाका अब चीनी कर्ज लेने की कीमत चुका रहा है, मगर कोई सबक नहीं सीख रहा है। बांग्लादेश भी अपने दक्षिण एशियाई पड़ोसी देशों जैसे श्रीलंका की राह पर चल पड़ा है।

विश्व बैंक की नवीनतम ”अंतरराष्ट्रीय ऋण रिपोर्ट 2025” के अनुसार, बांग्लादेश का विदेशी कर्ज पिछले पांच वर्षों में 42 प्रतिशत बढ़ गया है, और 2024 के आखिर तक कुल विदेशी कर्ज लगभग 105 अरब डालर तक पहुंच गया, जो 2010 में 26 अरब डलर था।

बहरहाल, एशियन न्यूज पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, चीन से लगातार कर्ज लेने की वजह से 2022 में कोलंबो सावरेन डेट डिफाल्ट (सम्प्रभु ऋण डिफल्ट) की स्थिति में पहुंच गया; जिसके बाद वहां आर्थिक संकट आ गया।

 इसके अलावा, पाकिस्तान ने चीनी कर्ज चुकाने के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आइएमएफ) की एक्सटेंडेड फंड फैसिलिटी से सात अरब डालर मांगे हैं। चीन पाकिस्तान इकनामिक कोरिडोर के तहत, इस्लामाबाद पर चीन का लगभग 30 अरब डलर का कर्ज है।

रिपोर्ट में बताया गया है, ”बांग्लादेश कर्ज के जाल में फंस गया है। इस बात की पुष्टि खुद बांग्लादेश के नेशनल बोर्ड फ रेवेन्यू के चेयरमैन एम. अब्दुर रहमान खान ने की है।” बांग्लादेश के लिए कर्ज चुकाना बजट का दूसरा सबसे बड़ा खर्च बन गया है।

बांग्लादेश का डेट-टू-जीडीपी रेशियो 2017-18 में लगभग 34 प्रतिशत से बढ़कर 39 प्रतिशत से ज्यादा हो गया है। हाल ही में एक सेमिनार में जाने-माने अर्थशास्त्री मुस्तफिजुर रहमान ने इस बात पर अफसोस जताया कि बांग्लादेश के रेवेन्यू बजट में सैलरी और पेंशन के बाद कृषि और शिक्षा दूसरा सबसे बड़ा खर्च हुआ करता था; लेकिन अब ऐसा नहीं है।

इसके अलावा, वित्त सचिव एम. खैरूज्जमां मजूमदार ने कहा है कि बांग्लादेश का इस साल का नेशनल बजट, देश के इतिहास में पहली बार, पिछले साल के बजट से छोटा है। उन्होंने कहा, ”यह ऐसा है जैसे किसी दुबले-पतले आदमी को और वजन कम करने के लिए कहा गया हो।” 


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *