पितृभक्ति की पराकाष्ठा! भगवान परशुराम ने क्यों काटा था अपनी ही मां का सिर?
भगवान विष्णु के छठे अवतार और ‘अजेय’ योद्धा माने जाने वाले भगवान परशुराम का व्यक्तित्व जितना शांत है, उनका क्रोध उतना ही प्रलयंकारी। हाथ में फरसा, कंधे पर धनुष और माथे पर तेज- परशुराम ही इकलौते ऐसे अवतार हैं जो अमर माने जाते हैं और आज भी धरती पर जीवित हैं। लेकिन, उनके जीवन की सबसे हैरान कर देने वाली और रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना वह है, जब उन्होंने अपने पिता के एक आदेश पर अपनी ही सगी मां का सिर धड़ से अलग कर दिया था।
सुनने में यह किसी क्रूरता जैसा लगता है, लेकिन इसके पीछे छिपी वजह और परशुराम की बुद्धिमानी आपकी सोच बदल देगी। आइए जानते हैं उस रहस्यमयी कहानी के बारे में।
तपोबल की शक्ति और कच्चा घड़ापरशुराम के पिता महर्षि जमदग्नि और माता रेणुका परम तपस्वी थे। माता रेणुका की पवित्रता का आलम यह था कि वे नदी से जल लाने के लिए आग में पके हुए नहीं, बल्कि कच्ची मिट्टी के घड़े का इस्तेमाल करती थीं। उनके सतीत्व और तपोबल की शक्ति ऐसी थी कि कच्ची मिट्टी का घड़ा भी पानी में नहीं गलता था।
श्रीमद्भागवत पुराण: स्कंद 9, अध्याय 16 (श्लोक 5-8) में इस घटना का विस्तार से उल्लेख है। पद्म पुराण: इस पुराण में भी भगवान परशुराम के चरित्र और इस घटना का वर्णन मिलता है। भगवान परशुराम ने यह सिद्ध किया कि कभी-कभी धर्म के कठिन मार्ग पर चलने के लिए बड़े बलिदान देने पड़ते हैं, लेकिन अगर मन में सच्चाई और ईश्वर पर विश्वास हो, तो अनर्थ भी मंगल में बदल जाता है।
