हत्या के आरोप में उम्रकैद की सजा काट रहे याह्या ढेबर को हाईकोर्ट से झटका
बिलासपुर: चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बिभू दत्त गुरू की डिवीजन बेंच ने हत्या के आरोप में उम्रकैद की सजा काट रहे याह्या ढेबर की पैरोल बढ़ाने के लिए दायर याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि पैरोल देने से पीड़ित पक्ष में डर पैदा हो सकता है और आरोपी के फरार होने की आशंका भी है।
आरोपी ने अपनी मां के 40वें अनुष्ठान के लिए पैरोल का आवेदन कलेक्टर रायपुर को दिया था, लेकिन कलेक्टर द्वारा इसे खारिज करने के बाद उसने रिट याचिका दायर की थी।
रायपुर निवासी याह्या ढेबर को स्पेशल जज रायपुर ने 31 मई 2007 के आदेश के माध्यम से भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 427 और 120बी के तहत दोषी ठहराया था। उसे 1,000 रुपये के जुर्माने के साथ उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। सजा मिलने के बाद वह 15 फरवरी 2010 तक सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने तक हिरासत में रहा। निचली अदालत के फैसले के खिलाफ उसने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी, जिसे हाईकोर्ट ने 4 अप्रैल 2024 को खारिज कर एक सप्ताह के अंदर सरेंडर करने का निर्देश दिया था। इसके बाद आरोपी ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर की। एसएलपी लंबित रहने के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने 15 अप्रैल 2024 को सरेंडर का समय एक सप्ताह के बजाय तीन सप्ताह तक बढ़ा दिया। फिर आरोपी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए 30 अप्रैल 2024 को पुलिस के समक्ष सरेंडर कर दिया।
मां के गंभीर रूप से बीमार होने पर आरोपी ने हाईकोर्ट में पैरोल के लिए याचिका दायर की, जो खारिज हो गई। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने पर सुप्रीम कोर्ट ने मानवीय आधार पर 24 सितंबर 2025 और 7 अक्टूबर 2025 के आदेशों के तहत गंभीर रूप से बीमार मां से मिलने के लिए कुल 28 दिनों की अंतरिम जमानत दी। याचिकाकर्ता ने 21 अक्टूबर 2025 को सरेंडर कर दिया। उसके बाद उसने अपनी गंभीर रूप से बीमार मां के साथ रहने और शोक के उद्देश्य से 14 दिनों की साधारण/सामान्य छुट्टी (पैरोल) के लिए नई अर्जी दी, जिसे प्रतिवादी प्राधिकरण ने अस्वीकार कर दिया।
