छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के नए जिलाध्यक्षों की सूची जारी होने के बाद उठने लगे सवाल, वरिष्ठों के पसंद के चेहरे हावी
रायपुर: कांग्रेस के जिलाध्यक्षों की नई सूची जारी किए जाने के बाद संगठन सृजन अभियान पर सवाल उठने लगे हैं। सूची में कई ऐसे नाम शामिल किए गए हैं, जिन्हें वरिष्ठ नेताओं का पसंदीदा व करीबी माना जाता है। जबकि, अभियान शुरू होने के समय वरिष्ठों को दूर रखा गया था।
कई जिलों में ऐसे चेहरे जिलाध्यक्ष बने हैं जो लंबे समय से शीर्ष नेताओं के करीबी रहे हैं। इससे यह सवाल उठ रहा है कि यदि चयन पहले से तय था, तो अभियान चलाने की आवश्यकता ही क्या थी?
चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवालपार्टी के भीतर यह भी चर्चा है कि अभियान की बैठकों में वरिष्ठ नेताओं को शामिल न करना और फिर उनकी ही पसंद के नेताओं को पद देना, चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है। हालांकि, पदाधिकारियों का कहना है कि सभी नियुक्तियां व्यापक विचार-विमर्श के बाद की गई हैं और संगठन को मजबूत बनाने के लिए आवश्यक कदम है। प्रदेश के सभी जिलों में नए अध्यक्षों की नियुक्ति के लिए 9 से 17 अक्टूबर तक संगठन सृजन अभियान चलाया गया था। एआइसीसी ने सभी जिलों के लिए 17 पर्यवेक्षक नियुक्त किए थे।
विधायक को सौंपी जिलाध्यक्ष की कमानपार्टी से जुड़े नेताओं का कहना है कि महासमुंद में जिलाध्यक्ष की कमान द्वारिकाधीश यादव को सौंपी गई है। जबकि, वे वर्तमान में खल्लारी विधानसभा सीट से विधायक हैं। इन्होंने जिलाध्यक्ष बनने के लिए आवेदन भी नहीं किया था, फिर भी कमान सौंपी गई है। अभियान के दौरान एक व्यक्ति, एक पद का दावा किया गया था।
ऐसे ही नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत, प्रदेशाध्यक्ष दीपक बैज, पूर्वमुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव, विधायक देवेन्द्र यादव, विधायक उमेश पटेल व अन्य वरिष्ठों के करीबी नेताओं को उनके जिलों में जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली है। वहीं, सुकमा में पूर्व मंत्री कवासी लखमा के बेटे हरीश लखमा को कमान सौंपी गई है।
पांच महिलाओं को जगहकांग्रेस के 41 जिलाध्यक्षों में 13 ओबीसी, चार एसटी, पांच एससी, एक अल्पसंख्यक और 18 सामान्य वर्ग से हैं। पांच महिलाओं को भी जगह मिली है। इनमें सुमित्रा धृतलहरे (बलौदाबाजार), तारिणी चंद्राकर (धमतरी), गजमती भानु (गौरेला-पेंड्रा-मरवाही), रश्मि गभेल (सक्ती) और शशि सिंह (सूरजपुर) शामिल हैं। महिलाओं की यह हिस्सेदारी कुल जिलाध्यक्षों की 12.2 प्रतिशत है।
