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टूट रहा कोयला मजदूरों के सब्र का बांध, बड़ा आंदोलन शुरू करने की चेतावनी - Somanshu News

टूट रहा कोयला मजदूरों के सब्र का बांध, बड़ा आंदोलन शुरू करने की चेतावनी

टूट रहा कोयला मजदूरों के सब्र का बांध, बड़ा आंदोलन शुरू करने की चेतावनी

बिश्रामपुर : क्षेत्र की कोयला खदानों में सालों से दबी हुई पीड़ा अब आग बनकर बाहर निकल आई है। दक्षिण पूर्वी कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) के बिश्रामपुर क्षेत्र में मजदूरों का सब्र का बांध पूरी तरह टूट चुका है..। संयुक्त कोयला मजदूर संघ एसकेएमएस एटक ने प्रबंधन को घोर उदासीन और बहरी सरकार कहते हुए दिसंबर में चार चरणों का बड़ा आंदोलन शुरू करने का ऐलान कर दिया है। अगर समय रहते न्याय नहीं मिला तो 26 दिसंबर से आमरण अनशन शुरू हो जाएगा और कोयला उत्पादन ठप हो जाएगा..।

संघ ने महा प्रबंधक को 34 सूत्री चार्जशीट सौंपी है..! हर मुद्दा मजदूरों के सीने में खंजर की तरह चुभा हुआ है। जिसके बताया गया है कि आईआर बैठकें सालों से बंद, पदोन्नतियां अटकी पड़ी हैं, मकान बंटवारे में खुला घोटाला चल रहा है, करीब तीन सौ रिटायर्ड कर्मचारियों का पेंशन रिवीजन लंबित, बलरामपुर खदान का CTO लैप्स, कुम्दा के कर्मचारियों पर बाहर ट्रांसफर की तलवार लटक रही है, रिटायर्ड लोगों का अपमान हो रहा है, राम साय, अंजनी कुमार सिंह, जैनुल आबेदिन, सुखराम, सुबरन, एडमंड एक्का, रतन विश्वकर्मा के आश्रित और सुरेश, रिजवान, जगलाल, शिवलाल, संतोष शर्मा, राजीव मिश्रा जैसे दर्जनों दया-नियुक्ति के मामले सालों से धूल फांक रहे हैं।

संघ की ओर से साफ कहा हमने बार-बार चिट्ठी लिखी, मीटिंग की बात की लेकिन प्रबंधन के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी। अब मजदूरों का सब्र जवाब दे चुका है। न्याय नहीं मिला तो पूरा क्षेत्र बंद कर देंगे।

आंदोलन का कार्यक्रम इस तरह है कि पहले चरण में 1 से 6 दिसंबर तक सभी यूनिटों में गेट मीटिंग, 15 दिसंबर को महाप्रबंधक दफ्तर के सामने बड़ा धरना, 22 से 25 दिसंबर तक क्रमिक भूख हड़ताल और अंत में 26 दिसंबर से आमरण अनशन शुरू हो जाएगा।

बिश्रामपुर क्षेत्र के हजारों कोयला मजदूर और उनके परिवार इसे अपने हक की आखिरी लड़ाई मान रहे हैं। प्रबंधन अभी तक खामोश है। यदि दिसंबर के पहले सप्ताह तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो छत्तीसगढ़ की कोयला पट्टी में उत्पादन और औद्योगिक शांति दोनों पर भारी संकट छा जाएगा।

मजदूरों का साफ संदेश है कि कोयला हम खोदते हैं, देश की बिजली हम जलाते हैं, लेकिन जब हमारे हक की बात आती है तो प्रबंधन को नींद आ जाती है। अब हम उस नींद को तोड़ेंगे!


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