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लहसुन की खेती में सही समय पर यह करें, कंद और पैदावार दोनों बढ़ेंगे, बाजार में मिलेगा अच्छा दाम - Somanshu News

लहसुन की खेती में सही समय पर यह करें, कंद और पैदावार दोनों बढ़ेंगे, बाजार में मिलेगा अच्छा दाम

लहसुन की खेती में सही समय पर यह करें, कंद और पैदावार दोनों बढ़ेंगे, बाजार में मिलेगा अच्छा दाम

लहसुन एक लाभदायक नकदी फसल है जो किसानों को उच्च उत्पादन और अच्छा मुनाफा देती है. इसकी खेती में सफलता पाने के लिए बुवाई से लेकर कटाई तक हर चरण में सावधानी बरतना आवश्यक है. फसल की सही देखभाल, उचित समय पर खाद और उर्वरकों का सही मात्रा में प्रयोग बेहद जरूरी है. अगर इस प्रक्रिया में थोड़ी भी लापरवाही होती है, तो इसका सीधा असर फसल की पैदावार पर पड़ता है. बेहतर परिणाम के लिए किसानों को लहसुन की खेती में संतुलित उर्वरकों का प्रयोग करना चाहिए, जिससे कंद का आकार बढ़े और कुल उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हो.

जिला कृषि रक्षा अधिकारी विजय कुमार के अनुसार, हमारे क्षेत्र में लहसुन की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है और इससे किसानों को अच्छी आमदनी भी होती है. हालांकि कभी-कभी फसल तो अच्छी होती है, लेकिन लहसुन के कंद छोटे रह जाते हैं, जिससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है. ऐसे मामलों में यदि किसान लहसुन की फसल में सही तरीके से आवश्यक चीजों का उपयोग करें, तो न केवल कंद का आकार बढ़ेगा, बल्कि फसल की कुल पैदावार भी अच्छी होगी.

लहसुन की अधिक पैदावार के लिए पोटाश और बोरान का इस्तेमाल करना चाहिए. लहसुन की फसल में बोरान डालने से पैदावार बढ़ती है और कंद का आकार भी बेहतर होता है. बोरान का स्प्रे लहसुन के कंद को फटने से बचाता है, जिससे कंद की गुणवत्ता बनी रहती है और फसल की मजबूती भी बढ़ती है.

लहसुन की फसल के 60 से 70 दिन के बीच म्यूरेट ऑफ पोटाश का उपयोग करना बेहद फायदेमंद होता है. यह फसल में पोटाश की कमी को पूरा करता है, जिससे कंद का आकार और गुणवत्ता दोनों बेहतर होती हैं. इस समय पर लहसुन की फसल में 30-50 किग्रा प्रति एकड़ की दर से म्यूरेट ऑफ पोटाश डालना चाहिए. इससे लहसुन के कंद का सही विकास होता है और फसल अधिक मात्रा में तैयार होती है.

लहसुन की फसल में बोरान का उपयोग बेहद लाभकारी साबित होता है. इसका उपयोग करने के लिए 200 ग्राम बोरान को 150-200 लीटर पानी में घोलकर फसल पर स्प्रे करना चाहिए. बोरान लहसुन के पौधों में कैल्शियम और अन्य पोषक तत्वों के अवशोषण को बढ़ाता है, जिससे लहसुन के कंद का आकार मोटा होता है. इसका सीधा फायदा यह होता है कि बाजार में मोटे कंद वाले लहसुन की कीमत भी अच्छी मिलती है.

लहसुन की फसल 50 से 70 दिन में कंद बनने की अवस्था में होती है और इस समय पौधों को अधिक पोटाश की आवश्यकता होती है. यदि आप एक एकड़ क्षेत्र में 1 किलोग्राम एनपीके को पानी में घोलकर फसल पर छिड़काव करते हैं, तो इससे लहसुन के कंद का आकार बढ़ता है और कुल उत्पादन में भी वृद्धि होती है.

सिंचाई भी लहसुन की फसल के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है. 70 से 80 दिन के बीच फसल की सिंचाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए. इस समय फसल की जरूरत के अनुसार ही पानी देना चाहिए और अत्यधिक पानी से बचना जरूरी है, क्योंकि ज्यादा पानी देने से लहसुन के कंद खराब हो सकते हैं.


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