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खेतों की मेड़ पर इस विधि से लगाएं लहसुन... बल्ब जैसी बड़ी होंगी कलियां! - Somanshu News

खेतों की मेड़ पर इस विधि से लगाएं लहसुन… बल्ब जैसी बड़ी होंगी कलियां!

खेतों की मेड़ पर इस विधि से लगाएं लहसुन… बल्ब जैसी बड़ी होंगी कलियां!

लहसुन न सिर्फ रसोई की ज़रूरत है, बल्कि किसानों के लिए मुनाफे की एक सुनहरी फसल भी साबित भी है. अगर इसकी खेती सही तकनीक और बेहतर बीजों के साथ की जाए तो कम लागत में अधिक उपज और बढ़िया आमदनी प्राप्त कर सकते हैं. भारत में लहसुन की बढ़ती मांग और प्रोसेसिंग इंडस्ट्री में इसके इस्तेमाल ने किसानों के लिए इसके उत्पादन को एक लाभकारी विकल्प बना दिया है. आइए जानते हैं विशेषज्ञ से ऐसी तकनीक जिससे कम लागत मे जायदा मुनाफा मिल सकता है.
लहसुन की खेती के लिए अक्टूबर से नवंबर का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है, क्योंकि इस दौरान तापमान ठंडा और नमी संतुलित रहती है, जो इसके अंकुरण के लिए आदर्श होती है. वहीं दक्षिण भारत या गर्म इलाकों में इसकी बुवाई सितंबर के अंत से दिसंबर तक की जा सकती है. लहसुन की बुवाई के लिए अच्छी जलनिकासी वाली दोमट या बलुई दोमट मिट्टी उपयुक्त रहती है. आमतौर पर ये फसल 4 से 5 माह में तैयार हो जाती है और यदि वैज्ञानिक तरीके से की जाए तो इससे अच्छी उपज और मुनाफा दोनों प्राप्त किए जा सकते हैं.
इस विधि से लगाएं लहसुन
अलीगढ़ मंडल के उप निदेशक उद्यान अधिकारी बलजीत सिंह ने बताया कि लहसुन की खेती परंपरागत रूप से खुले खेतों में की जाती है, जिसे ओपन फील्ड क्रॉप कहा जाता है. इसके पौधों की दूरी (स्पेसिंग) कम रखी जाती है क्योंकि इसके बीज यानी बल्ब का आकार जितना छोटा होता है. यदि खेत की मेड़ों को थोड़ा ऊंचा करके उस पर पौधे लगाए जाएं, तो इससे बल्बों का समूह बड़ा बनता है. साथ ही, सिंचाई, निराई और गुड़ाई करने में भी आसानी होती है, जिससे उत्पादन की गुणवत्ता बेहतर होती है और किसान को अधिक मुनाफा मिलता है.
लहसुन की टॉप किस्में
बलजीत सिंह ने बताया कि लहसुन एक कमर्शियल यानी व्यावसायिक फसल है और इससे अच्छी आमदनी प्राप्त की जा सकती है. भारत सरकार की एक संस्था एनएचआरडीएफ (National Horticultural Research and Development Foundation) इस फसल का बीज तैयार करती है. किसान वहां से प्रमाणित बीज प्राप्त कर सकते हैं. एनएचआरडीएफ द्वारा विकसित जी-1, जी-50 और जी-82 जैसी प्रचलित किस्में बेहतर उपज देती हैं. बीज हमेशा किसी मानक और प्रमाणित संस्था से ही खरीदा जाना चाहिए ताकि फसल में गुणवत्ता बनी रहे.
इस कारण बढ़ रही डिमांड
बलजीत सिंह ने बताया कि लहसुन की फसल में आमतौर पर कीट और रोगों का प्रकोप बहुत कम होता है, जिससे इसका प्रबंधन आसान रहता है. यह फसल आज के समय में अत्यधिक मांग में है क्योंकि इसे औषधीय उपयोगों के साथ-साथ प्रोसेसिंग इंडस्ट्री में भी बड़े पैमाने पर प्रयोग किया जाता है. लहसुन का पेस्ट, जूस, लिक्विड गार्लिक और एसेंस बनाकर इसका उपयोग किया जाता है, जिससे किसानों को अतिरिक्त लाभ प्राप्त हो सकता है.

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