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CSPDCL में 151 करोड़ के फर्जी टेंडर का खुलासा - Somanshu News

CSPDCL में 151 करोड़ के फर्जी टेंडर का खुलासा

CSPDCL में 151 करोड़ के फर्जी टेंडर का खुलासा

रायपुर :जानकारी के अनुसार फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर के.आर.सी कंट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड, रायपुर , ए.के. कंट्रक्शन रायपुर एवं लक्ष्मी टर्नसफार्मर सिकंदराबाद ने जवाइन वेचर कर आरडीएसएस प्रोजेक्ट कांकेर में 151 करोड़ का टेंडर हासिल किया जो सीधे तौर पर विभागीय अधिकारियों के मिलीभगत से मिलना नामुमकिन था। चूंकि मामला 2023 का था और नई सरकार के गठन का समय होने के कारण विभागीय मंत्री और नई सरकार को इस फर्जी टेंडर की जानकारी नही थी। और अधिकारियों ने आगे कार्रवाई सरकार और विभागीय मंत्री को संज्ञान में लाये बिना टेंडर को आगे बढ़ाकर कार्य आरंभ करवा दिया।

छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी अपनी कारस्तानी से हमेशा सुर्खियों में रहता है कभी अनाप-शनाप बिजली बिल तो कभी करोंड़ों के टेंडर फर्जियों को सौंपने को लेकर चर्चा में रहै है। राजनीतिक रसूख और अधिकारियों के सांठगांठ के सैकड़ों मामले बिजली विभाग में चल रहे है। जिसकी आज तक जांच तक नहीं हो पाई है। जो मामले सामने आते है वहीं खबर सोशल मीडिया और चौक -चौराहों में चलते रहता।

सूचना के अधिकार से हुआ खुलासा

छत्तीसगढ़ राज्य विदयुत वितरण कंपनी लिमिटेड (सीएसपीडीसीएल) में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े का मामला उजागर हुआ है। सूचना के अधिकार की पड़ताल से मिली जानकारी के अनुसार, अधिकारियों द्वारा फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र एवं कार्य पूर्णता प्रमाणपत्र जारी कर कुछ ठेकेदारों को अवैध रूप से करोड़ों के ठेके दिलवाए जाने का मामला सामने आया है। इन्ही मे से एक मामला वर्ष 2016 से जुड़ा है, जब सीएसपीडीसीएल द्वारा जारी एलओए संख्या 02- 08/डीयूजीजेवाय/स्नद्गद्गस्रद्गह्म्ह्य रुद्य4शस्र/क्कड्डष्द्मड्डद्दद्ग-14/ञ्जस्-07/3497 क्रड्डद्बश्चह्वह्म्, दिनांक 29.10.2016 के आधार पर एक ही कार्य पूर्णता प्रमाणपत्र दो बार जारी किया गया। आश्चर्य की बात यह है कि दोनों प्रमाणपत्रों पर डिस्पैच नंबर और 25.05.2022 ही दर्ज है।

पहले प्रमाणपत्र में केवल एक ठेकेदार सृष्टि कंस्ट्रक्शन्स का नाम दर्ज है, वहीं, उसी दिनांक व डिस्पैच नंबर पर जारी दूसरे प्रमाणपत्र में कार्य का विवरण पूरी तरह समान रहते हुए, ठेकेदारों के नामों में हेरफेर कर ए.के. कंस्ट्रक्शन एवं श्री श्याम विद्युत का नाम भी जोड़ा गया है। जानकारी मिली है कि इसी फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर के. आर. सी कंट्रक्शंस प्राइवेट लिमिटेड रायपुर,ए.के.कंस्ट्रक्शन रायपुर एवं लक्ष्मी ट्रांसमिशन सिकन्दराबाद ने ज्वाइंट वेंचर कर के आरडीएसएस परियोजना के कांकेर में 151 करोड़ का टेंडर निर्धारित दरों से अधिक दरों पर काम दिया गया। मामले में विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका गहराई से जताई जा रही है। सूत्र का कहना है कि विभागीय अफसरों की मदद से कई ठेकेदारों को टेंडर प्रक्रिया मे भाग लेने हेतु फर्ज़़ी प्रमाण पत्र जारी कर अनुचित लाभ पहुंचाया गया है।

इस गंभीर फर्जीवाड़े ने न केवल विभाग की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह खड़ा किया है, बल्कि यह भी साफ हो गया है कि प्रभावशाली ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए उच्च पदस्थ अधिकारी किस हद तक जाकर नियमों को ताक पर रख सकते हैं। इस मामले में विभागीय एवं शासन स्तर पर सरकार कब और कैसे संज्ञान लेकर कार्रवाई करती है। यह पहला मामला नहीं है इससे पहले भी सीएसपीडीसीएल में करोड़ों के घोटाले हुए है जिसकी एसीबी और ईओ्डब्ल्यू में शिकायत की गई है एवं जिसकी जांच चल रही है। यदि सीएसपीडीसीएल के मामले में गंभीरता से जांच की गई तो कई औऱ बड़े मामले सामने आ सकते है।

यदि फर्जी अनुभव सर्टिफिकेट से टेंडर हुआ है तो उस पर कार्रवाई के साथ टेंडर निरस्त किया जाएगा। इस संबंध में मुझे जानकारी नहीं है मैं अभी-अभी ज्वाइन किया हूं। मेरे संज्ञान में लाइए मैं एक्शन लूंगा।

-मधुकर जामुलकर

मुख्य अभियंता (प्रोजेक्ट) रायपुर


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