केंचुआ इन डिमांड:प्रदेश में जैविक खेती ने केंचुए को बनाया कीमती, महिलाओं ने सालभर में 13 लाख कमाए

केंचुआ इन डिमांड:प्रदेश में जैविक खेती ने केंचुए को बनाया कीमती, महिलाओं ने सालभर में 13 लाख कमाए

बारिश या नम मौसम में नजर आने वाले केंचुए हर किसी को बेचैन करते हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ में जैविक खेती और खाद के रूप में वर्मी कंपोस्ट के चलन ने इन्हें कीमती बना दिया है। जैविक खाद बनाने के लिए सरकारी तौर पर तथा बाजारों में केंचुए काफी मात्रा में बेचे जाने लगे हैं। हालात ये हैं कि जगदलपुर के बकावंड में केंचुए पर काम कर रहे महिलाओं के ग्रुप पंचवटी महिला स्वसहायता समूह ने एक साल में सिर्फ केंचुए बेचकर 13 लाख रुपए से अधिक कमाए हैं।

जबकि प्रदेश के कृषि विभाग ने पिछले साल इन महिलाओं को आइसेनिया फ्रेडिडा प्रजाति के 10 किलो केंचुए रायपुर से मंगवाकर दिए थे। महिलाओं के समूह ने सालभर में केंचुओं को इस तरह पाला कि ये बढ़कर 546 क्विंटल हो गए। खर्चा-पानी काटकर महिलाओं ने इनकी बिक्री से इतनी रकम कमाई। इस कमाई से कुछ ने गहने लिए तो कुछ ने दोपहिया खरीद ली।

पंचवटी महिला समूह की महिलाओं ने बताया कि उन्होंने दंतेवाड़ा और सुकमा जिलों में खेती के लिए केंचुए सप्लाई किए हैं। यही नहीं, कृषि और उद्यानिकी विभागों ने भी उनसे केंचुए 250 रुपए किलो में खरीदे हैं। खाद बनाने के लिए इनकी सप्लाई अब बस्तर जिले के साथ अन्य गौठानों में की जा रही है। महिलाओं ने बताया कि केंचुए ताजा गोबर में ज्यादा पैदा होते हैं।

समूह की अध्यक्ष गोमती देवांगन के मुताबिक वर्मी कंपोस्ट खाद बनाने के दौरान ही वे केंचुए का उत्पादन भी कर लेते हैं, यानी इस काम में अतिरिक्त लागत नहीं लग रही है। महिलाओं का यह समूह किसानों से 2 रुपए प्रति किलो गोबर खरीद रहा है। इस गोबर से गौठानों में जैविक खाद बनती है, जो बिना केंचुए के संभव नहीं है। इसलिए पूरे प्रदेश में केंचुए की डिमांड बढ़ रही है।

केंचुओं का कमाल: वर्मी कंपोस्ट ही 17 लाख क्विंटल बना डाली
छत्तीसगढ़ के गाैठानों में अब तक 17 लाख से ज्यादा क्विंटल वर्मी कंपोस्ट का निर्माण किया जा चुका है। इनमें से 15 लाख क्विंटल खाद की बिक्री की जा चुकी है। गोबर खरीदी के माध्यम से गौठानों में कंपोस्ट खाद बनाया जा रहा है। वर्मी खाद बनाने के लिए बड़ी मात्रा में केंचुए की जरूरत पड़ती है। खाद बनाने के लिए गोबर से टांके की भराई के बाद उसमें केंचुआ छोड़ दिया जाता है। ये पत्ते और गोबर को खाकर वर्मी कंपोस्ट में बदल देते हैं।

सबसे ज्यादा केंचुए इसी ग्रुप के
केंचुआ उत्पादन और वर्मी कंपोस्ट की बिक्री में पंचवटी महिला समूह प्रदेश में नंबर-1 हो गया है। ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी और गौठान नोडल प्रवीण पांडे ने कहा कि इस समूह ने केंचुए बेचने के अलावा करीब 3600 क्विंटल वर्मी कंपोस्ट (जैविक खाद) बेचकर 9 लाख रुपए और कमाए हैं। यह भी प्रदेश में सबसे ज्यादा है। इन महिलाओं के पास सरकारी विभागों ही नहीं, सीधे जिलों से भी केंचुए की काफी मांग आ रही है।

सिर्फ 60 दिनों में पांच गुना
समूह की महिलाओं ने बताया कि केंचुआ पैदा करने के लिए वर्मी बेड में ताजा गोबर, बेसन और मसूर पाउडर के साथ गुड़ डाल देते हैं। इनसे केंचुए 60 दिन में ही 5 गुना हो जाते हैं। यही केंचुए गोबर के वर्मी कंपोस्ट में बदल देते हैं। साथ ही वर्मी वाश भी तैयार हो जाता है, जिसका उपयोग पौधे लगाने में किया जा रहा है।

घरेलू जरूरतें पूरी होने लगीं
समूह की अध्यक्ष गोमती देवांगन ने बताया कि केंचुआ और वर्मी कंपोस्ट बेचने से मिले पैसों से बड़ी बेटी की शादी की और पति के लिए बाइक भी खरीदी। यही नहीं, बाकी बेटियों को बिना परेशानी के पढ़ा रही हैं। समूह की नीलिमा देवांगन ने कहा कि केंचुआ उत्पादन से मिले पैसों से गहने और अन्य समान खरीद पाईं। नीलिमा के साथ-साथ भगवती देवांगन ने भी साल में एक लाख रुपए से ज्यादा कमाए हैं। समूह की हेमलता और पूरनी बाई समेत अन्य महिलाओं को भी 50 से 70 हजार तक की आय हुई है।


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